सोहराब आलम, मोतिहारी। बिहार सरकार ने पर्यावरण संरक्षण और नदियों के जल प्रवाह को बेहतर बनाने की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण और अनूठी रणनीति तैयार की है। इसके तहत अब नदियों में जमा गाद (सिल्ट) का उपयोग ईंट भट्टों से जुड़े निर्माण कार्यों में किया जाएगा। इस योजना से एक तरफ जहां नदियों की सफाई और उनके प्राकृतिक संरक्षण का रास्ता साफ होगा, वहीं दूसरी ओर उपजाऊ मिट्टी के कटाव से भी राहत मिलेगी।

​नदियों की सफाई और पर्यावरण संरक्षण

​उत्तरी बिहार में गंडक, बूढ़ी गंडक और अन्य प्रमुख नदियों में भारी मात्रा में गाद जमा होने के कारण नदियों की गहराई कम हो रही है और जल प्रवाह बाधित होता है। खनन विभाग द्वारा बनाई जा रही इस नई नीति के तहत नदियों के बीच जमे इसी सिल्ट की व्यवस्थित ढंग से निकासी कराई जाएगी। इससे नदियों की जल धारण क्षमता बढ़ेगी, बाढ़ का खतरा कम होगा और जलीय पारिस्थितिकी तंत्र भी सुरक्षित रहेगा।

​ईंट निर्माण में मिट्टी के कटाव से मुक्ति

​पारंपरिक रूप से ईंट निर्माण के लिए खेतों और उपजाऊ जमीनों की ऊपरी मिट्टी का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है, जिससे कृषि योग्य भूमि को भारी नुकसान पहुंचता है। नदियों के गाद को ईंट भट्टों के उपयोग में लाने से न केवल खेतों की उपजाऊ मिट्टी का क्षरण रुकेगा, बल्कि निर्माण सामग्री की मांग भी पर्यावरण-अनुकूल तरीके से पूरी होगी।

​सरकार को होगा करोड़ों का राजस्व लाभ

​खान एवं भूतत्व विभाग के मंत्री प्रमोद चंद्रवंशी ने इस योजना की जानकारी देते हुए स्पष्ट किया है कि सरकार इसके लिए एक ठोस और पारदर्शी नीति तैयार कर रही है। विभाग द्वारा सिल्ट खनन की इस प्रक्रिया से राज्य सरकार को हर साल लाखों-करोड़ों रुपये का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा। यह कदम राज्य के आर्थिक विकास और संसाधन प्रबंधन दोनों के लिहाज से एक मील का पत्थर साबित होगा।