भागलपुर। जिले का बाईपास थाना एक बार फिर गंभीर चर्चा और विवादों के घेरे में आ गया है। महकमे की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगाते हुए मात्र चार महीने के भीतर इस थाने में तैनात तीसरे पुलिस अधिकारी पर निलंबन की बड़ी कार्रवाई की गई है। ताजा मामला मवेशी लदी एक संदिग्ध गाड़ी को थाना क्षेत्र से सुनियोजित तरीके से भगाए जाने से जुड़ा है, जिसके बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है।
क्या है पूरा मामला और कैसे हुआ फरार ट्रक?
घटना 20 अगस्त 2026 की देर शाम की है। बाईपास थाना क्षेत्र में पुलिस ने मवेशी लदे एक वाहन को जांच के लिए रोका था। इस पूरी कार्रवाई और वाहन की निगरानी की जिम्मेदारी प्रभारी पदाधिकारी के रूप में तैनात सहायक अवर निरीक्षक (ASI) नीरज कुमार के कंधों पर थी।
इसी दौरान ड्यूटी पर तैनात चौकीदार ने वरीय अधिकारियों को सूचना दी कि एएसआई नीरज कुमार की या तो भारी लापरवाही रही है या फिर उनका आचरण पूरी तरह संदिग्ध था। इसी लापरवाही का फायदा उठाकर मवेशी से लदा वह वाहन मौके से फरार हो गया।
एसएसपी की सख्त कार्रवाई और बरामदगी
मामले की गंभीरता को भांपते हुए वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) प्रमोद कुमार यादव ने तत्काल प्रभाव से एएसआई नीरज कुमार को निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें केवल सामान्य जीवनयापन भत्ता मिलेगा और उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
इसके साथ ही, एसएसपी ने थानाध्यक्ष विकास कुमार को कड़ा निर्देश दिया कि हर हाल में फरार वाहन को जल्द से जल्द बरामद किया जाए। थानाध्यक्ष ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस टीम के साथ वाहन का पीछा किया और रात करीब 12 बजे पड़ोसी जिले सहरसा की सीमा क्षेत्र से मवेशी लदे ट्रक को ढूंढ निकाला। वाहन को वापस थाने लाकर पुलिस ने आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसमें भारी संख्या में मवेशी लदे पाए गए हैं।
चार महीने में तीन पुलिस अधिकारियों पर गिरी गाज
यह कोई पहला मौका नहीं है जब भागलपुर का बाईपास थाना विवादों में आया हो। पिछले चार महीनों के भीतर इसी थाने के तीन जिम्मेदार पुलिसकर्मी अनुशासनहीनता और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुके हैं:
- सुमन राय (पूर्व थानाध्यक्ष): ट्रकों से अवैध वसूली के गंभीर आरोपों के चलते निलंबित किए गए।
- चन्वीर यादव (पूर्व थानाध्यक्ष): अवैध वसूली के मामले में ही इन पर भी गाज गिरी और इन्हें निलंबित किया गया।
- नीरज कुमार (प्रभारी ASI): अब मवेशी लदा ट्रक भगाने के मामले में इन्हें निलंबित कर दिया गया है।
पुलिस और तस्करों की मिलीभगत का संदेह
स्थानीय नागरिकों, चालकों और ट्रांसपोर्टरों का साफ तौर पर कहना है कि पुलिस की कड़ी निगरानी या थाना क्षेत्र से किसी बड़े ट्रक का यूं आसानी से फरार होना बिना खाकी की मिलीभगत के असंभव है। इस घटना ने तस्करों और पुलिस के बीच किसी गहरे गठजोड़ के संदेह को और अधिक पुख्ता कर दिया है।
वरीय पुलिस अधीक्षक प्रमोद कुमार यादव ने इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि ड्यूटी के दौरान किसी भी प्रकार की कोताही, कर्तव्यहीनता या संदिग्ध आचरण को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषी पाए जाने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मी को बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

