पलवल। हरियाणा के पलवल में पाल बघेल गड़रिया समाज और पंजाबी समाज की अलग-अलग पंचायतों में सामाजिक कुरीतियों व फिजूलखर्ची को खत्म करने के लिए कई ऐतिहासिक और बड़े फैसले लिए गए हैं। दोनों समाजों ने शादी-ब्याह में सादगी अपनाने, फिजूलखर्ची रोकने और मृत्यु भोज जैसी पुरानी प्रथा पर पूरी तरह पाबंदी लगाने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया है। गड़रिया समाज की महापंचायत में तय किया गया है कि अब शादी में दूल्हा पक्ष से अधिकतम 51 लोग ही बारात में शामिल होकर जाएंगे, जबकि अन्य रस्मों में केवल 11-11 लोगों की मौजूदगी रहेगी।
मृत्यु भोज की जगह होगी श्रद्धांजलि सभा, शराब व डीजे पर भी प्रतिबंध
चौधरी ओमप्रकाश की अध्यक्षता में आयोजित पाल बघेल गड़रिया समाज की महापंचायत में समाज सुधार के लिए कई कड़े कड़े नियम बनाए गए। पंचायत में तय किया गया कि किसी की मृत्यु पर अब भारी-भरकम मृत्यु भोज आयोजित नहीं किया जाएगा, बल्कि इसकी जगह साधारण श्रद्धांजलि सभा का आयोजन होगा। इसके अलावा शादी-ब्याह और सामाजिक कार्यक्रमों में शराब पीने, तेज आवाज में डीजे बजाने और दिखावे पर पूरी तरह रोक लगाने का ऐलान किया गया। युवाओं को नशे और जुए जैसी लतों से दूर रखने के लिए भी विशेष अभियान चलाने पर जोर दिया गया।
पंजाबी समाज ने भी लिया अहम फैसला, पीड़ित परिवार का आर्थिक बोझ होगा कम
दूसरी तरफ, नरेश गांधी की अध्यक्षता में हुई पंजाबी समाज की पंचायत में भी समाजहित में बड़ा कदम उठाया गया है। पंजाबी समाज ने फैसला किया है कि समाज का कोई भी व्यक्ति अब किसी के घर मृत्यु भोज में शामिल नहीं होगा। पंचायत का मानना है कि किसी स्वजन के जाने के दुखद समय में मृत्यु भोज के कारण पीड़ित परिवार पर बेवजह का बड़ा आर्थिक बोझ पड़ता है। दोनों समाजों की इन पंचायतों द्वारा उठाए गए इस अनुकरणीय कदम की पूरे क्षेत्र में सराहना की जा रही है।
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