पटना। स्थित बेऊर जेल में बंद जमुई जिले के सिकंदरा अंचल के पूर्व संविदा राजस्वकर्मी छोटे लाल यादव की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। सोमवार देर रात उन्हें गंभीर हालत में पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (पीएम सीएच) लाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। छोटे लाल यादव को आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने गत 30 सितंबर को कृषि फार्म की 10 एकड़ सरकारी जमीन की फर्जी रजिस्ट्री और अवैध दाखिल-खारिज के मामले में गिरफ्तार किया था, जिसके बाद से वे न्यायिक हिरासत में बेऊर जेल में बंद थे।

​इलाज में लापरवाही का आरोप

​मृतक छोटे लाल यादव के बेटे प्रवीण कुमार ने जेल प्रशासन पर भारी लापरवाही का गंभीर आरोप लगाया है। प्रवीण कुमार, जो खुद मुजफ्फरपुर के अहियापुर थाने में दरोगा के पद पर तैनात हैं, उनका कहना है कि उनके पिता पिछले कई दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे, लेकिन जेल प्रशासन ने उनके समय पर और उचित इलाज में घोर लापरवाही बरती। इसी चिकित्सकीय लापरवाही के चलते उनकी जान चली गई। हालांकि, इस संवेदनशील मामले पर फिलहाल जेल प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है और वे पूरी तरह चुप्पी साधे हुए हैं।

​जमीन घोटाला और ईओयू की कार्रवाई

​यह पूरा मामला भू-माफिया गुड्डू यादव और जमुई जिला परिषद अध्यक्ष दुलारी देवी से जुड़े बहुचर्चित जमीन घोटाले की चल रही व्यापक जांच से संबंधित है। इस मामले में ईओयू ने छोटे लाल यादव के साथ-साथ प्रदीप चौधरी और जवाहर प्रसाद यादव को भी गिरफ्तार किया था। जांच के दौरान यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि आरोपियों ने करीब 100 साल पुराने जाली दस्तावेज तैयार करवाकर बहुमूल्य सरकारी जमीन को अपनी निजी संपत्ति के रूप में दर्शाया और उसका अवैध रूप से दाखिल-खारिज भी करवा लिया।
​इस घोटाले की जद में तत्कालीन अंचल अधिकारी विनोद चौधरी, राजस्व पदाधिकारी निभा कुमारी और मुकेश कुमार वर्णवाल जैसे कई अन्य अधिकारी भी आ चुके हैं, जिनकी भूमिका की गहन जांच की जा रही है। ईओयू ने मुख्य आरोपी गुड्डू यादव, उनकी पत्नी दुलारी देवी और गिरोह के अन्य सहयोगियों के खिलाफ भी संगीन धाराओं में मामला दर्ज किया है। जांच में दुलारी देवी के नाम पर सात एकड़ जमीन की खरीद के तीन दस्तावेज बरामद हुए हैं, जिसे निर्धारित सरकारी दर से भी काफी कम कीमत पर खरीदे जाने का गंभीर आरोप है।

​कमजोर वर्ग की जमीन पर अवैध कब्जा और फर्जी दस्तावेज

​आर्थिक अपराध इकाई ने इसी साल जुलाई के महीने में गुड्डू यादव के विभिन्न ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी कर इस फर्जी खरीद-बिक्री के नेटवर्क का भंडाफोड़ किया था। इस सिलसिले में 27 जुलाई को आर्थिक अपराध थाना कांड संख्या 14/26 दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू की गई थी। जांच में यह बात प्रमुखता से सामने आई कि यह गिरोह समाज के कमजोर और असहाय लोगों की जमीनों को तीसरे पक्षों के मार्फत जबरन विवादित बनाता था। इसके बाद उन जमीनों को औने-पौने दामों पर खरीदकर ऊंचे और महंगे दामों पर बाजार में बेच दिया जाता था।
​ईओयू इस पूरे संगठित आपराधिक नेटवर्क और इसमें संलिप्त तमाम प्रशासनिक एवं अन्य लोगों की भूमिका की परतें टटोलने में जुटी है। विभाग के मुताबिक, कृषि विभाग ने वर्ष 1959 में कृषि फार्म की इस जमीन का विधिवत अधिग्रहण किया था। इसके बावजूद, आरोपियों ने स्थानीय अंचल कार्यालय के भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ कथित रूप से मिलीभगत करके वर्ष 1924 और 1927 के फर्जी पुराने दस्तावेज तैयार किए। इन्हीं फर्जी कागजातों को आधार बनाकर सरकारी जमीन की खरीद-फरोख्त और दाखिल-खारिज का खेल खेला गया। मुंगेर के अवर निबंधक और सिकंदरा के अंचल अधिकारी द्वारा दी गई रिपोर्ट में भी इन पुराने दस्तावेजों को पूरी तरह फर्जी करार दिया गया है।