Bihar MLC Results: बिहार MLC चुनाव नतीजों के बाद एक दिलचस्प सियासी तस्वीर देखने को मिलेगी। यहां अब दो सगे भाई एक साथ सदन में बैठेंगे, लेकिन दोनों की राजनीतिक राह अलग-अलग है। बड़े भाई राजीव कुमार कांग्रेस से विधान परिषद के सदस्य हैं, जबकि छोटे भाई संजीव कुमार सिंह ने पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से जीत दर्ज कर विधान परिषद में अपनी जगह बनाई है। दोनों भाइयों के अलग-अलग दलों से जुड़े होने के कारण यह चर्चा का विषय बना हुआ है।

संजीव कुमार ने नवल किशोर यादव को हराया

पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में RJD समर्थित डॉ. संजीव कुमार सिंह ने बीजेपी के निवर्तमान विधान पार्षद प्रो. नवल किशोर यादव को शिकस्त दी है। नवल किशोर यादव इस सीट से पांच बार MLC रह चुके थे। इस बार संजीव कुमार ने उन्हें पीछे छोड़ते हुए जीत हासिल की।

चुनाव में संजीव कुमार को 4,487 वोट मिले, जबकि नवल किशोर यादव के पक्ष में 3,430 वोट पड़े। इस तरह संजीव कुमार ने 1,057 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। इस नतीजे के साथ ही पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में बीजेपी को झटका लगा और RJD समर्थित उम्मीदवार विधान परिषद पहुंचने में कामयाब रहे।

बड़े भाई राजीव कुमार कांग्रेस से हैं MLC

संजीव कुमार सिंह के बड़े भाई राजीव कुमार पहले से ही बिहार विधान परिषद के सदस्य हैं। उन्होंने वर्ष 2022 में कांग्रेस के टिकट पर बेगूसराय-खगड़िया स्थानीय प्राधिकार निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव जीता था। उस चुनाव में उन्होंने बीजेपी उम्मीदवार रजनीश कुमार को हराया था।

अब छोटे भाई संजीव कुमार सिंह की जीत के बाद दोनों भाई एक ही सदन में नजर आएंगे। हालांकि, दोनों अलग-अलग राजनीतिक दलों से जुड़े हैं। ऐसे में विधान परिषद में दोनों की मौजूदगी को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है।

पिता भी रह चुके हैं विधायक और मंत्री

राजीव और संजीव कुमार का परिवार लंबे समय से बिहार की राजनीति में सक्रिय रहा है। उनके पिता रामानंद प्रसाद सिंह परबत्ता विधानसभा क्षेत्र से कई बार विधायक चुने गए थे। वह बिहार सरकार में मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल चुके थे। 10 मई 2025 को उनका निधन हो गया था।

संजीव कुमार सिंह खुद भी विधानसभा की राजनीति में सक्रिय रहे हैं। वह खगड़िया जिले की परबत्ता विधानसभा सीट से जेडीयू के विधायक रह चुके हैं। वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने RJD के टिकट पर चुनाव लड़ा था, लेकिन जीत हासिल नहीं कर सके। इसके बाद अब विधान परिषद चुनाव में मिली जीत ने उन्हें एक बार फिर बिहार की राजनीति में चर्चा में ला दिया है। दोनों भाई कांग्रेस और RJD जैसी अलग-अलग राजनीतिक पार्टियों से जुड़े होने के बावजूद एक ही सदन में साथ बैठेंगे।

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