सत्या राजपूत, रायपुर। स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा जारी लगभग 100 करोड़ रुपये की मैनपावर सप्लाई निविदा अब विवादों में घिर गई है। स्थानीय एजेंसियों और व्यापारिक संगठनों ने टेंडर प्रक्रिया में भारी अनियमितता और “मैच फिक्सिंग” का आरोप लगाया है। आरोप है कि निविदा की शर्तें पहले से तय चहेते कंपनी को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से बनाई गई थी, ताकि स्थानीय और छोटे सेवा प्रदाताओं को प्रक्रिया से बाहर किया जा सके।

सबसे बड़ा विवाद Earnest Money Deposit (EMD) को लेकर खड़ा हुआ है। करीब 100 करोड़ रुपये की निविदा में मात्र 6 लाख रुपये की EMD तय किए जाने पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय व्यवसायियों का कहना है कि इतनी बड़ी निविदा के मुकाबले यह राशि बेहद कम है और सामान्य सरकारी नियमों व प्रथाओं के विपरीत है। व्यापारिक संगठनों ने आरोप लगाया कि EMD की कम राशि और निविदा की अन्य शर्तें किसी विशेष कंपनी को लाभ पहुंचाने के लिए तय की गई थी।

narayana

अलग-अलग सेवाओं को एक टेंडर में जोड़ने पर आपत्ति

निविदा में सुरक्षा गार्ड, सफाई कर्मी, कंप्यूटर ऑपरेटर, ड्राइवर, फिटर और तकनीकी स्टाफ जैसी विभिन्न सेवाओं को एक साथ शामिल किया गया है। पहले इन सेवाओं के लिए अलग-अलग निविदाएं जारी की जाती थी, जिससे छोटे और मध्यम स्तर के स्थानीय ठेकेदार भी भाग ले पाते थे। अब सभी सेवाओं को एक ही टेंडर में शामिल किए जाने से छोटे सेवा प्रदाताओं के लिए पात्रता हासिल करना लगभग असंभव हो गया है।

पात्रता शर्तों को बताया असंभव

निविदा में रखी गई पात्रता शर्तों पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। प्रमुख शर्तों में न्यूनतम 300 मैनपावर का अनुभव, 10 करोड़ रुपये का एकल वर्क ऑर्डर, 100 करोड़ रुपये का वार्षिक टर्नओवर शामिल हैं। स्थानीय एजेंसियों का कहना है कि चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत राज्य में कभी भी 300 कर्मचारियों वाले एकल कार्यादेश जारी नहीं हुए हैं। ऐसे में यह शर्तें केवल बड़ी बाहरी कंपनियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से रखी गई है।

GeM पोर्टल पर टेंडर नहीं डालने का आरोप

स्थानीय सेवा प्रदाताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार के 2017 के निर्देशों के बावजूद इस बड़ी निविदा को Government e-Marketplace (GeM) पोर्टल पर प्रकाशित नहीं किया गया। साथ ही टेंडर का पर्याप्त प्रचार-प्रसार भी नहीं किया गया, जिससे कई एजेंसियों को समय पर जानकारी तक नहीं मिल सकी।

उच्चस्तरीय जांच की मांग

विभिन्न व्यापारिक संगठनों और सेवा प्रदाताओं ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने EMD निर्धारण, पात्रता शर्तों, GeM पोर्टल के उपयोग नहीं करने और निविदा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं।

क्या बोले चिकित्सा शिक्षा संचालक?

मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. यूएस पैकरा ने कहा कि टेंडर को लेकर कई शिकायतें प्राप्त हुई है। प्रक्रिया GeM पोर्टल के माध्यम से शुरू की गई थी, लेकिन फिलहाल टेंडर हटा दिया गया है और नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा रही है।

Lalluram.Com के व्हाट्सएप चैनल को Follow करना न भूलें.
https://whatsapp.com/channel/0029Va9ikmL6RGJ8hkYEFC2H

खेल की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
छत्तीसगढ़ की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें