हेमंत शर्मा, इंदौर। इंदौर करीब छह साल पहले इंदौर को दहला देने वाले एरोड्रम थाना क्षेत्र के बहुचर्चित डबल मर्डर केस में आखिरकार अदालत ने बड़ा फैसला सुना दिया। पति-पत्नी की निर्मम हत्या के मामले में मुख्य आरोपी धनंजय यादव को अदालत ने दोहरी उम्रकैद की सजा सुनाई है। यह मामला सिर्फ दोहरे हत्याकांड की वजह से ही नहीं, बल्कि पुलिस की वैज्ञानिक जांच के कारण भी पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना था।इस केस की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि वारदात का कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं था। घटनास्थल पर मौजूद एक मामूली सी च्युइंग गम ने पूरे हत्याकांड का राज खोल दिया। इसी च्युइंग गम से मिले डीएनए ने आरोपी को बेनकाब कर दिया और अदालत में उसे दोषी साबित करने में सबसे अहम भूमिका निभाई।
प्रेम प्रसंग बना डबल मर्डर की वजह
यह सनसनीखेज वारदात 16 दिसंबर 2020 की रात एरोड्रम थाना क्षेत्र में हुई थी। घर में घुसकर नीलम शर्मा और उनके पति ज्योतिप्रसाद शर्मा की सत्तूर से हमला कर हत्या कर दी गई थी। घटना के बाद पूरे शहर में सनसनी फैल गई थी।जांच के दौरान सामने आया कि आरोपी धनंजय यादव मृतक दंपति की नाबालिग बेटी के संपर्क में था। परिवार दोनों के मिलने का विरोध करता था। अभियोजन के अनुसार इसी रंजिश के चलते धनंजय ने दोनों की हत्या की साजिश रची और वारदात को अंजाम दिया।
कोई चश्मदीद नहीं… फिर भी बच नहीं पाया आरोपी
हत्या रात के अंधेरे में हुई थी। घर में कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं था। ऐसे में पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती आरोपी तक पहुंचने की थी।तत्कालीन विवेचक राहुल शर्मा और उनकी टीम ने घटनास्थल से हर छोटे-बड़े साक्ष्य को वैज्ञानिक तरीके से एकत्र किया। इसी दौरान पुलिस को वहां एक च्युइंग गम मिली। फॉरेंसिक लैब में जांच के दौरान उस च्युइंग गम से मिले डीएनए का मिलान आरोपी धनंजय यादव से किया गया और रिपोर्ट पूरी तरह मैच हो गई।यही डीएनए इस पूरे मुकदमे का सबसे मजबूत वैज्ञानिक साक्ष्य बना।
सीसीटीवी और तकनीकी साक्ष्यों ने मजबूत किया केस
डीएनए के अलावा पुलिस ने शहरभर के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। आरोपी की आवाजाही, घटनास्थल तक पहुंचने और वहां से निकलने की कड़ियों को तकनीकी साक्ष्यों से जोड़ा गया। पुलिस ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की पूरी श्रृंखला तैयार की, जिसने अदालत के सामने अभियोजन पक्ष का मामला मजबूत कर दिया।
25 गवाह… और कोर्ट ने सुना दिया फैसला
अभियोजन पक्ष ने अदालत में 25 गवाहों के बयान, डीएनए रिपोर्ट, फॉरेंसिक रिपोर्ट और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्य प्रस्तुत किए। इन सभी तथ्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी धनंजय यादव को दोषी करार देते हुए दोहरी उम्रकैद की सजा सुनाई।
नाबालिग बेटी का मामला अलग
जांच के दौरान मृतक दंपति की नाबालिग बेटी की भूमिका भी सामने आई थी। हालांकि घटना के समय उसकी उम्र 18 वर्ष से कम होने के कारण उसका मामला अलग से बाल न्यायालय में विचाराधीन है। इसलिए इस फैसले का उस प्रकरण पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
फॉरेंसिक जांच की बड़ी मिसाल बना मामला
उप संचालक अभियोजन राजेंद्र सिंह भदौरिया ने बताया कि इस मामले में प्रत्यक्षदर्शी गवाह नहीं होने के बावजूद वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को दोषी साबित किया गया। उनका कहना है कि डीएनए जांच, सीसीटीवी फुटेज और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों ने पूरे मामले की कड़ी को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कानून से बच नहीं पाया कातिल
एरोड्रम डबल मर्डर केस का यह फैसला एक बार फिर साबित करता है कि अपराधी चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, वैज्ञानिक जांच और मजबूत साक्ष्यों के सामने उसकी साजिश ज्यादा दिनों तक छिप नहीं सकती। एक मामूली सी दिखने वाली च्युइंग गम ने पूरे हत्याकांड की गुत्थी सुलझा दी और आखिरकार आरोपी को दोहरी उम्रकैद तक पहुंचा दिया।
Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m


