हेमंत शर्मा, इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में जमीन हड़पने का ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने राजस्व व्यवस्था और जमीन की खरीद-फरोख्त पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि एक जिंदा महिला को सरकारी दस्तावेजों में मृत घोषित कर उसकी करोड़ों रुपये की जमीन का नामांतरण करा दिया गया। इसके बाद कथित तौर पर जमीन को बेच भी दिया गया। इस पूरे मामले में महिला ने अपने ससुराल पक्ष के कई लोगों सहित राजेंद्र नगर थाने में 13 नामजद आरोपियों और अन्य लोगों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार जिस जमीन को लेकर विवाद है, उसकी बाजार कीमत 100 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है। वहीं पुलिस इस पूरे मामले में उज्जैन के भूमाफियाओं से संभावित कनेक्शन की भी पड़ताल कर रही हैं।

पति की मौत के बाद शुरू हुआ कथित षड्यंत्र

एफआईआर के मुताबिक फरियादी द्रोपदीबाई ने पुलिस को बताया कि वह मूल रूप से ग्राम बीजलपुर मुंडी रोड की रहने वाली हैं और वर्तमान में अपनी बेटी के साथ कनाड़िया क्षेत्र में रह रही हैं। उनके पति स्वर्गीय रणछोड़दास के नाम पर राजस्व रिकॉर्ड में सर्वे नंबर 567, रकबा 5.647 हेक्टेयर जमीन दर्ज थी। पति के निधन के बाद नियमानुसार जमीन उनके नाम दर्ज हो गई थी, लेकिन इसी दौरान कथित रूप से ससुराल पक्ष के लोगों ने विश्वास में लेकर कई दस्तावेजों पर उनके अंगूठे लगवा लिए। महिला का आरोप है कि उन्हें बताया गया था कि यह प्रक्रिया जमीन के रिकॉर्ड और राजस्व संबंधी औपचारिकताओं के लिए है, लेकिन बाद में इन्हीं दस्तावेजों का कथित रूप से गलत इस्तेमाल किया गया।

मकान भी बेच दिया, फिर घर से निकालने का आरोप

शिकायत में महिला ने यह भी आरोप लगाया कि ससुराल पक्ष ने गांव का मकान भी बेच दिया और बिक्री की रकम उन्हें नहीं दी। कुछ समय तक साथ रखने के बाद छोटी-छोटी बातों पर विवाद, गाली-गलौज और मारपीट की गई। आखिरकार उन्हें घर से निकाल दिया गया। इसके बाद उनकी बेटी सुनीता उन्हें अपने साथ लेकर रहने लगी।

बेटी ने निकाला रिकॉर्ड, खुल गया पूरा खेल

मामले का खुलासा तब हुआ जब बेटी सुनीता ने जमीन के रिकॉर्ड निकलवाए। दस्तावेज देखने पर पता चला कि राजस्व रिकॉर्ड से महिला का नाम हट चुका है और जमीन का नामांतरण अन्य लोगों के नाम कर दिया गया है। इसके बाद नामांतरण के खिलाफ एसडीएम न्यायालय में अपील दायर की गई। शिकायत के अनुसार एसडीएम के समक्ष चली कार्यवाही में यह जानकारी सामने आई कि रिकॉर्ड में महिला को मृत दर्शाया गया था। इसी आधार पर आगे की राजस्व कार्रवाई की गई। महिला का कहना है कि वह जीवित हैं, लेकिन उन्हें मृत दिखाकर उनकी संपत्ति पर कब्जा करने की साजिश रची गई।

फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनाकर नामांतरण का आरोप

एफआईआर में गंभीर आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने मिलकर महिला का फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार कराया। इसी कथित फर्जी दस्तावेज के आधार पर जमीन का नामांतरण कराया गया और बाद में करोड़ों रुपये की जमीन का सौदा कर दिया गया। फरियादी का कहना है कि उन्हें पूरे घटनाक्रम की कोई जानकारी नहीं थी और उनकी सहमति भी नहीं ली गई।

100 करोड़ से ज्यादा कीमत की जमीन पर नजर

जानकारी के अनुसार विवादित जमीन तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्र में स्थित है। रियल एस्टेट कारोबारियों के मुताबिक इस जमीन की वर्तमान बाजार कीमत 100 करोड़ रुपये से अधिक आंकी जा रही है। इसी वजह से इस मामले को जमीन से जुड़े बड़े फर्जीवाड़े के रूप में देखा जा रहा है। पुलिस अब जमीन के नामांतरण, बिक्री और उससे जुड़े सभी दस्तावेजों की जांच कर रही है।

इन लोगों पर दर्ज हुआ मामला

पुलिस ने शिकायत के आधार पर कैलाश चौधरी, शंकर चौधरी, जगदीश चौधरी, प्रकाश चौधरी, विष्णु चौधरी, शांतिलाल चौधरी, राजन चौधरी, सदन चौधरी, पवित्रा चौधरी, पार्वती चौधरी, लखन चौधरी, मनोज चौधरी, रामू नागदावाला सहित अन्य लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है। आरोप है कि सभी ने मिलकर कथित रूप से फर्जी दस्तावेज तैयार किए, महिला को मृत दर्शाया, नामांतरण कराया और जमीन बेच दी।

पुलिस के सामने बड़ी चुनौती

यह मामला केवल एक परिवार के संपत्ति विवाद तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसमें राजस्व रिकॉर्ड, नामांतरण प्रक्रिया, कथित फर्जी दस्तावेज और करोड़ों रुपये की जमीन के सौदे जैसे कई गंभीर पहलू जुड़े हुए हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र किसने तैयार किया, नामांतरण की प्रक्रिया किन दस्तावेजों के आधार पर पूरी हुई और जमीन आखिर किन लोगों को बेची गई। यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं तो यह इंदौर के सबसे बड़े भूमि फर्जीवाड़ों में शामिल हो सकता है और इसमें कई अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है।

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