अजय सैनी, भिवानी। छोटी काशी के नाम से विख्यात भिवानी नगरी इन दिनों पूरी तरह से भक्तिमय रंग में रंगी हुई है। स्थानीय हनुमान ढाणी स्थित हनुमान जोहड़ी मंदिर परिवार द्वारा आयोजित की जा रही भव्य नगर परिक्रमा वीरवार को अपने 425वें दिन में प्रवेश कर गई। बालयोगी महंत चरणदास महाराज के पावन सान्निध्य में निकाली जा रही इस परिक्रमा को लेकर स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं में अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिल रहा है। कडक़ती धूप और बदलते मौसम की परवाह किए बिना सैकड़ों श्रद्धालु प्रतिदिन सुबह-सुबह भगवान के भजनों और जयकारों के साथ शहर की सडक़ों पर निकल रहे हैं।

425 दिनों से लगातार चल रही इस धार्मिक यात्रा की सबसे खास बात यह है कि यह केवल एक परिक्रमा नहीं, बल्कि भिवानी की समृद्ध विरासत को पुनर्जीवित करने का एक सराहनीय प्रयास है। इस यात्रा के माध्यम से युवा पीढ़ी न केवल विभिन्न प्राचीन मंदिरों के दर्शन कर रही है, बल्कि भिवानी के ऐतिहासिक दरवाजों के महत्व और उनके पीछे छिपे गौरवशाली इतिहास से भी रूबरू हो रही है। इस धार्मिक आयोजन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बालयोगी महंत चरणदास महाराज ने श्रद्धालुओं को विशेष संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में पुरुषोत्तम मास (अधिकमास) का एक अत्यंत विशिष्ट और पावन स्थान है। इस पवित्र महीने में किए गए दान, पुण्य, संकीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों का फल अन्य दिनों की तुलना में अनंत गुना अधिक मिलता है।

ऐसे पावन समय में नगर परिक्रमा का हिस्सा बनना और भगवान के नाम का सुमिरन करते हुए कदम बढ़ाना, साक्षात प्रभु की कृपा प्राप्त करने के समान है। महंत चरणदास महाराज ने कहा कि नगर परिक्रमा केवल एक शारीरिक यात्रा नहीं है, बल्कि यह आत्मा की शुद्धि और समूचे नगर के कल्याण की कामना का एक जरिया है। जब सैकड़ों भक्त एक साथ नि:स्वार्थ भाव से समाज की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करते हुए परिक्रमा करते हैं, तो पूरे वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इससे न केवल व्यक्ति का मानसिक तनाव दूर होता है, बल्कि समाज में आपसी भाईचारा और समरसता की भावना भी सुदृढ़ होती है। उन्होंने बताया कि 24 जून अमावस्या पर विशाल नगर परिक्रमा निकाली जाएगी।