Dharm Desk – भगवान शिव के कई ऐसे मंदिर है, जिनसे जुड़ी पौराणिक कथाएं आज भी श्रद्धालुओं के बीच काफी प्रसिद्ध है। इन्हीं में एक श्री गोपीनाथ मंदिर है। सावन के महीने में जब शिवभक्त भोलेनाथ की पूजा और जलाभिषेक में जुटे हैं। तब इस मंदिर का महत्व और भी खास हो जाता है। गोपीनाथ मंदिर की सबसे खास बात यह है कि इसका संबंध भगवान शिव के गोपी रूप से बताया जाता है। मंदिर की प्राचीनता, परिरस में स्थापित विशाल त्रिशूल और भगवान रुद्रनाथ से जुड़ी परंपरा इसे उत्तराखंड के प्रमुख शिव मंदिरों में अलग पहचान देती है।

भगवान शिव ने क्यों धारण किया गोपी का रूप?
गोपीनाथ मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण जब वृंदावन में रासलीला कर रहे थे। तब भगवान शिव भी उस दिव्य रास के दर्शन करना चाहते थे, लेकिन रास में केवल गोपियों को प्रवेश की अनुमति थी। ऐसे में भगवान शिव ने गोपी का रूप धारण किया और रासलीला में शामिल हुए। इसी कथा के चलते गोपेश्वर को भगवान शिव के गोपी रूप से जोड़कर देखा जाता है। यहां स्थित मंदिर को गोपीनाथ के नाम से जाना जाता है। सावन में इस कथा का विशेष रूप से स्मरण किया जाता है और दूर-दूर से श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए यहां पहुंचते है। यह मंदिर देव भूमि उत्तराखड के चमोली जिले के गोपेश्वर नगर में स्थित है।
विशाल त्रिशूल मंदिर परिसर में मौजूद है
गोपीनाथ मंदिर की पहचान यहां मौजूद विशाल अष्टधातु के त्रिशूल से भी होती है । इस त्रिशूल को लेकर भी एक पौराणिक कथा प्रचलित है। कहा जाता है कि भगवान शिव जब यहां तपस्या कर रहे थे, तब कामदेव ने उनकी तपस्या भंग करने का प्रयास किया। इससे भगवान शिव क्रोधित हो गए और उन्होंने अपना त्रिशूल चला दिया। यही त्रिशूल इस स्थान पर स्थापित होने की मान्यता है।मंदिर की वास्तुकला भी श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करती है। इसका निर्माण कत्यूरी काल से जुड़ी है और मंदिर में नागर शैली की स्थापत्य विशेषताएं देखने को मिलती है। मंदिर के गर्भगृह तक पहुंचने के लिए 24 द्वार होने की बात भी इसकी खासियतों में शामिल है।
रुद्रनाथ से भी जुड़ा है मंदिर
गोपीनाथ मंदिर का संबंध पंचकेदारों में शामिल भगवान रुद्रनाथ से भी बताया जाता। सर्दियों में जब भारी बर्फबारी के कारण रुद्रनाथ मंदिर के कपाट बंद रहते है, तब भगवान रुद्रनाथ की उत्सव डोली और चल विग्रह को गोपीनाथ मंदिर लाया जाता है। इसके बाद यहां शीतकाल में भगवान रुद्रनाथ की पूजा-अर्चना की जाती है।
सावन में क्यों जाएं गोपीनाथ मंदिर?
सावन भगवान शिव की आराधना का विशेष महीना माना जाता है। ऐसे में गोपीनाथ मंदिर में दर्शन करना शिवभक्तों के लिए खास अनुभव हो सकता है। यहां एक ओर भगवान शिव की प्राचीन पूजा परंपरा है, तो दूसरी ओर हिमालय की शांत और सुंदरवादियां मन को अलग ही शांति देती हैं।
गोपीनाथ मंदिर कैसे पहुंच सकते हैं
गोपीनाथ मंदिर चमोली जिले के गोपेश्वर नगर में स्थित है। यहां सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है। ऋषिकेश और हरिद्वार से गोपेश्वर के लिए बस और टैक्सी की सुविधा मिलती है। निकटतम प्रमुख रेलवे स्टेशन ऋषिकेश है, जबकि हवाई यात्रा करने वाले श्रद्धालु देहरादून के जॉली ग्रांट एयरपोर्ट तक पहुंचकर आगे सड़क मार्ग से गोपेश्वर जा सकते हैं।


