संजय वाणी आलीराजपुर। खनिज नीलामी और जमीन अधिग्रहण से प्रभावित आदिवासी गांवों के किसानों के अधिकारों को लेकर जोबट विधायक सेना महेश पटेल ने मोर्चा खोल दिया है। विधायक ने प्रभावित ग्रामीणों के साथ बैठक कर उनकी समस्याएं और राय जानी। जोबट विधायक कार्यालय में बैठक के बाद चंद्रशेखर आजाद नगर के डाक बंगले में भी ग्रामीणों से चर्चा की गई। सेना महेश पटेल ने कहा कि आदिवासी समाज के लिए जमीन सिर्फ संपत्ति नहीं, बल्कि उसकी पहचान, आजीविका और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य है। इसलिए जमीन से जुड़े किसी भी निर्णय में ग्रामीणों की बात, उनके अधिकार और पूरे मामले की पारदर्शिता जरूरी है।
जोबट विधायक सेना महेश पटेल ने साफ कहा कि खनिज नीलामी से प्रभावित किसानों की जमीन का मामला आगामी विधानसभा सत्र में प्रमुखता से उठाया जाएगा। जरूरत पड़ी तो आदिवासी विधायकों के साथ मिलकर लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन की रणनीति भी बनाई जाएगी।
“आदिवासी समाज की एक इंच जमीन भी नहीं जाने देंगे”
सेना महेश पटेल ने कहा कि क्षेत्र के आदिवासी किसानों के पास पहले से ही सीमित जमीन है। ऐसे में जमीन से जुड़े किसी भी प्रकरण में सरकार को किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि, “हम अपने आदिवासी समाज की जमीन की लड़ाई विधानसभा में भी लड़ेंगे और जरूरत पड़ी तो सड़क पर भी उतरेंगे। किसानों को डरने की जरूरत नहीं है।” विधायक ने कहा कि छोटी खट्टाली सहित अन्य प्रभावित क्षेत्रों में खनिज नीलामी की प्रक्रिया लंबे समय से चल रही है। ग्रामीणों को जब अपनी जमीन प्रभावित होने की जानकारी मिली तो उन्होंने अपनी चिंता सामने रखी। अब पूरे मामले में सरकार और प्रशासन को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
प्रभावित जमीन पर सरकार लिखित जवाब दे
सेना महेश पटेल ने भाजपा नेताओं और सरकार से सीधा सवाल किया कि यदि कांग्रेस द्वारा उठाया जा रहा जमीन का मुद्दा गलत है तो सरकार लिखित रूप से स्पष्ट करे कि खनिज नीलामी से प्रभावित किसानों की जमीन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि केवल कांग्रेस पर आरोप लगाने से ग्रामीणों की चिंता खत्म नहीं होगी। सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि प्रभावित पंचायतों और किसानों की जमीन को लेकर आगे क्या प्रक्रिया अपनाई जाएगी और उनके अधिकारों की सुरक्षा कैसे होगी।
बीजेपी कार्यकर्ताओं के धरने पर भी सवाल
जमीन के मुद्दे के साथ विधायक सेना महेश पटेल और आदिवासी विकास परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष महेश पटेल ने बीजेपी कार्यकर्ताओं के अपनी ही सरकार के खिलाफ धरने और ज्ञापन को लेकर भी सवाल खड़े किए। महेश पटेल ने कहा कि जब प्रदेश में भाजपा की सरकार है, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव हैं और नागर सिंह चौहान स्वयं कैबिनेट मंत्री हैं, तो उन्हें अपनी ही सरकार के खिलाफ धरना देने की जरूरत क्यों पड़ रही है?
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उन्होंने सवाल किया कि “सरकार आपकी, मुख्यमंत्री आपके, कैबिनेट आपकी और प्रशासन भी आपकी सरकार का है, फिर धरना किसके खिलाफ और ज्ञापन किसको?” उन्होंने कहा कि यदि मंत्री जिले को सूखाग्रस्त घोषित कराने या किसानों को राहत दिलाने की मांग कर रहे हैं तो उन्हें यह प्रस्ताव कैबिनेट में रखना चाहिए और मुख्यमंत्री से निर्णय करवाना चाहिए।
“अगर मंत्री की सुनवाई नहीं तो आम जनता की कौन सुनेगा?”
महेश पटेल ने कहा कि यदि एक कैबिनेट मंत्री को अपनी ही सरकार के सामने धरना-प्रदर्शन करना पड़ रहा है तो आम आदिवासी, किसान और गरीब की सुनवाई को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने भाजपा नेताओं से कहा कि कांग्रेस पर आरोप लगाने के बजाय उन्हें अपनी सरकार से जवाब मांगना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब कांग्रेस पहले किसानों और जमीन से जुड़े मुद्दों को लेकर आवाज उठा रही थी, तब उसे अफवाह और भ्रम फैलाने वाला बताया गया। अब भाजपा के नेता और मंत्री खुद आंदोलन कर रहे हैं तो जनता इसका जवाब चाहती है।
25 अगस्त के प्रदर्शन का भी हवाला
कांग्रेस नेताओं ने 25 अगस्त को बड़ी संख्या में ग्रामीणों के कलेक्टर कार्यालय पहुंचने का हवाला देते हुए कहा कि ग्रामीण अपनी जमीन और अधिकारों को लेकर पहले ही प्रशासन के सामने चिंता जता चुके हैं। सेना महेश पटेल ने कहा कि ग्रामीणों की आवाज को केवल राजनीतिक बयान समझकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। प्रभावित गांवों में जनसंवाद और रायशुमारी के माध्यम से लोगों की वास्तविक स्थिति सामने लाई जाएगी।
आदिवासी जमीन की खरीद-बिक्री की जांच की मांग
विधायक सेना महेश पटेल ने क्षेत्र में आदिवासी जमीन की खरीद-बिक्री से जुड़े मामलों की जांच की मांग भी की। उन्होंने कहा कि संदिग्ध परिस्थितियों में हुई जमीनों की खरीद-बिक्री और संबंधित दस्तावेजों की जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर कांग्रेस इस मामले को प्रशासन से लेकर न्यायालय तक ले जाएगी और किसानों के अधिकारों की कानूनी लड़ाई भी लड़ेगी।
विधानसभा से सड़क तक संघर्ष का ऐलान
सेना महेश पटेल ने कहा कि आगामी विधानसभा सत्र में जोबट क्षेत्र में जमीन के स्वामित्व, खनिज नीलामी और प्रभावित गांवों के किसानों के अधिकारों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने ग्रामीणों की मांगों और जमीन से जुड़े सवालों पर स्पष्ट जवाब नहीं दिया तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा। सेना महेश पटेल ने कहा कि जल, जंगल और जमीन के सवाल पर वे पीछे नहीं हटेंगी। आदिवासी किसानों की आवाज गांव से लेकर विधानसभा तक उठाई जाएगी और जरूरत पड़ने पर सड़क पर भी लोकतांत्रिक संघर्ष किया जाएगा। इन बैठकों में जोबट, उदयगढ़ और चंद्रशेखर आजाद नगर क्षेत्र के प्रभावित गांवों के ग्रामीणों ने अपनी समस्याएं और सुझाव रखे। रायशुमारी के बाद कांग्रेस ने प्रभावित गांवों में जनसंवाद बढ़ाने और आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने की बात कही।
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