दिल्ली में प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए ग्रैप (GRAP) का पहला चरण लागू होने के बाद ट्रैफिक पुलिस ने सख्ती बढ़ा दी है। प्रदूषण कम करने और वाहनों के प्रवेश पर लागू प्रतिबंधों का प्रभावी ढंग से पालन सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने पड़ोसी राज्यों के अधिकारियों के साथ समन्वय बैठक की। गुरुवार को विशेष पुलिस आयुक्त (ट्रैफिक) अजय चौधरी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में प्रदूषण नियंत्रण के उपायों पर चर्चा की गई।
नियमों का उल्लंघन करने वाली बसों पर होगी कार्रवाई
बैठक में निर्णय लिया गया कि नियमों का पालन नहीं करने वाली अंतर-शहरी और अंतर-राज्यीय बसों को दिल्ली-एनसीआर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। ऐसी बसों को दिल्ली की सीमा पर ही रोककर वापस भेज दिया जाएगा। इसका उद्देश्य प्रतिबंधों का उल्लंघन करने वाले वाहनों की आवाजाही पर अंकुश लगाना है। ट्रैफिक पुलिस की योजना के तहत बसों को दिल्ली में प्रवेश करने के बाद वापस मोड़ने के बजाय सीमा पर ही लौटाया जाएगा। इससे प्रमुख सड़कों पर जाम की स्थिति बनने से रोकने में मदद मिलेगी। साथ ही, अनावश्यक वाहनों की आवाजाही कम होने से प्रदूषण पर नियंत्रण के प्रयासों को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
इन बसों को ही दिल्ली-NCR में मिलेगी एंट्री
प्रदूषण नियंत्रण के लिए लागू निर्देशों के तहत दिल्ली-एनसीआर में केवल निर्धारित मानकों को पूरा करने वाली इलेक्ट्रिक, सीएनजी और बीएस-5 डीजल बसों को ही प्रवेश की अनुमति होगी। बैठक में एक नवंबर से 31 जनवरी 2027 तक दिल्ली के बाहर पंजीकृत वाहनों पर लागू प्रवेश प्रतिबंधों की भी समीक्षा की गई। नियमों का प्रभावी पालन सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली की सीमाओं पर बड़े सूचना बोर्ड लगाने और संयुक्त प्रवर्तन टीमें गठित करने पर चर्चा हुई।
इन वाहनों पर भी होगी कार्रवाई
अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि सीमाओं पर लगाए जाने वाले सूचना बोर्डों पर प्रतिबंधित वाहनों के प्रवेश से संबंधित नियम स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किए जाएं। इसके साथ ही नो-एंट्री के निर्धारित समय का सख्ती से पालन कराया जाए। दिल्ली को गंतव्य बनाए बिना यहां से गुजरने वाले वाहनों और निर्धारित क्षमता से अधिक माल ढोने वाले वाहनों की जांच भी तेज की जाएगी।
दिल्ली में प्रदूषण से पांच दिन तक राहत के आसार नहीं
दिल्ली की आबोहवा को लेकर हुए एक नए अध्ययन में सामने आया है कि प्रतिकूल वायुमंडलीय परिस्थितियों के कारण राजधानी में वायु प्रदूषण लगातार पांच दिनों तक एक ही जगह बना रह सकता है। ऐसे हालात में प्रदूषक तत्व वातावरण में जमा रहते हैं और वायु गुणवत्ता में सुधार की प्रक्रिया धीमी पड़ सकती है। वैज्ञानिक पत्रिका एनवायरमेंटल पॉल्यूशन में प्रकाशित शोध के अनुसार, प्रदूषण के स्तर और उसके बने रहने की अवधि को प्रभावित करने वाले कारकों में तापमान की प्रमुख भूमिका है। अध्ययन में बताया गया है कि मौसम संबंधी परिस्थितियां प्रदूषकों के फैलाव और उनके वातावरण में बने रहने को प्रभावित करती हैं। इस अध्ययन को जामिया मिल्लिया इस्लामिया, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के शोधकर्ताओं ने किया है।
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