Automobile Desk : भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में अब नई गाड़ियों के साथ ‘एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम’ यानी ADAS का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है। कंपनियां इसे एक बड़े सेफ्टी फीचर के रूप में प्रचारित कर रही हैं और ग्राहक भी इसे खूब पसंद कर रहे हैं। ADAS तकनीक में लगे रडार, कैमरे और सेंसर गाड़ी चलाते समय सामने आने वाले खतरों को समय रहते भांप लेते हैं। यह सिस्टम आपको लेन बदलने पर अलर्ट करता है, आगे चल रहे वाहन से सुरक्षित दूरी बनाए रखने में मदद करता है और आपात स्थिति में ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग भी लगा सकता है। लेकिन अगर आप इसे पूरी तरह ऑटोमैटिक या ‘ऑटोपायलट’ समझकर सड़क पर उतर रहे हैं, तो यह लापरवाही भारी पड़ सकती है।

ADAS आपकी ड्राइविंग को आसान और सुरक्षित बनाने के लिए तैयार किया गया एक असिस्टेंट है, न कि आपका विकल्प। ऑटो एक्सपर्ट्स का स्पष्ट मानना है कि कार चाहे कितनी भी आधुनिक क्यों न हो, सड़क पर अंतिम नियंत्रण हमेशा इंसान के हाथ में ही होना चाहिए।
सिस्टम पर अति-विश्वास पड़ सकता है भारी
अक्सर देखा जाता है कि ADAS वाली गाड़ी मिलते ही लोग स्टीयरिंग से हाथ हटा लेते हैं या ड्राइविंग के दौरान मोबाइल का इस्तेमाल करने लगते हैं। यह आदत दुर्घटना का कारण बन सकती है। हर वाहन निर्माता कंपनी के ADAS का काम करने का तरीका और उसकी क्षमता अलग होती है। ऐसे में अपनी कार का यूजर मैनुअल ध्यान से पढ़ना बेहद जरूरी है।
अचानक सामने से आने वाले वाहन, तीखे मोड़, या चढ़ाई-उतराई वाली सड़कों पर कई बार सेंसर स्थिति को सही समय पर समझ नहीं पाते। ऐसी जगहों पर अगर आप अलर्ट नहीं रहेंगे तो हादसा हो सकता है। ट्रैफिक पर लगातार नजर बनाए रखना और जरूरत पड़ने पर तुरंत मैनुअल कंट्रोल लेना ड्राइवर का ही काम है।
सेंसर और कैमरों की देखरेख है सबसे जरूरी
ADAS सिस्टम का दिल उसकी विंडशील्ड पर लगे कैमरे और बंपर में स्थित रडार सेंसर होते हैं। अगर इन पर धूल, कीचड़, ओस या सूखा कचरा जमा हो जाए, तो सिस्टम को आसपास की चीजें धुंधली दिखाई देने लगती हैं। खराब दृश्यता के कारण सेंसर गलत संकेत दे सकते हैं या काम करना बंद कर सकते हैं।
अगर आपकी कार के डैशबोर्ड पर ADAS से जुड़ा कोई एरर या वॉर्निंग लाइट जलती दिखाई दे, तो उसे कभी भी अनदेखा न करें। सबसे पहले कैमरे और रडार की सतह को साफ कपड़े से साफ करें। सफाई के बाद भी अगर वॉर्निंग लाइट बनी रहती है, तो तुरंत ऑथराइज्ड सर्विस सेंटर जाकर कार को चेक कराएं।
खराब मौसम और पेचीदा सड़कों पर रखें खास ध्यान
भारत की सड़कों और मौसम का मिजाज पल-पल बदलता है। तेज बारिश, घना कोहरा, तेज धूप का रिफ्लेक्शन या सड़कों की धुंधली लेन मार्किंग के दौरान ADAS के सेंसर सीमित क्षमता के साथ काम करते हैं। घुमावदार रास्तों पर सड़क किनारे पैदल चल रहे लोगों या अचानक लेन में आने वाली बाइक को सेंसर देर से पहचान पाते हैं।
मौसम खराब होने या पेचीदा रास्तों पर कार की गति हमेशा नियंत्रित रखें और आगे चल रही गाड़ी से सामान्य से ज्यादा दूरी बनाकर चलें। यह तकनीक हादसों की संभावना को कम करने में मददगार है, लेकिन यह किसी चमत्कार की गारंटी नहीं देती। जिम्मेदारी से की गई ड्राइविंग ही आपको और आपके परिवार को सुरक्षित रख सकती है।



