संजय पाटीदार, भोपाल। राजधानी भोपाल में 41 साल पहले हुई गैस त्रासदी के बाद अब यूनियन कार्बाइड परिसर को पूरी तरह जहर मुक्त बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। राज्य सरकार ने करीब तीन करोड़ रुपये का एक्शन प्लान तैयार किया है, जिसके तहत जहरीली मिट्टी और दूषित भूजल को वैज्ञानिक तकनीकों से साफ किया जाएगा। हाई कोर्ट के निर्देश के बाद शुरू हुई इस कार्रवाई से आसपास की बस्तियों को भी राहत मिलने की उम्मीद है।
जहरीली गैस से हजारों लोगों की हुई थी मौत
2-3 दिसंबर 1984 की दरमियानी रात भोपाल में यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री से जहरीली मिथाइल आइसोसायनेट गैस का रिसाव हुआ था। इस हादसे में हजारों लोगों की मौत हो गई थी, जबकि लाखों लोग इसकी चपेट में आए थे। करीब 41 साल पहले दुनिया की सबसे भयावह औद्योगिक त्रासदियों में शामिल भोपाल गैस कांड के घाव अब मिटाने की अंतिम तैयारी शुरू हो गई है। बंद पड़े यूनियन कार्बाइड परिसर को पूरी तरह जहर मुक्त बनाने के लिए राज्य सरकार ने करीब तीन करोड़ रुपये का रिहैबिलिटेशन प्लान तैयार किया है। इस योजना के तहत फैक्ट्री परिसर की जहरीली मिट्टी, दूषित भूजल और रसायनों से भरे ढांचों को वैज्ञानिक तकनीकों से साफ किया जाएगा, ताकि भविष्य में इस जमीन का सुरक्षित उपयोग हो सके।
परिसर में पड़े 358 मीट्रिक टन जहरीले कचरे को पीथमपुर में किया गया नष्ट
मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने 13 मार्च 2026 को राज्य सरकार को पांच सप्ताह के भीतर मिट्टी और पानी की सफाई का विस्तृत प्लान पेश करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास विभाग ने यह एक्शन प्लान तैयार किया है। आपको बता दे कि इससे पहले परिसर में पड़े 358 मीट्रिक टन जहरीले कचरे को पीथमपुर भेजकर नष्ट किया जा चुका है।
योजना के तहत सबसे पहले विशेषज्ञ एजेंसी पूरे परिसर का वैज्ञानिक सर्वे करेगी। मिट्टी और भूजल के नमूने लेकर यह पता लगाया जाएगा कि जहरीले रसायन कितनी गहराई तक फैले हुए हैं। इसके बाद सॉइल वाशिंग और केमिकल ऑक्सीडेशन जैसी आधुनिक तकनीकों से मिट्टी को शुद्ध किया जाएगा।
भूमिगत दूषित पानी को साफ करने के लिए पंप एंड ट्रीट तकनीक अपनाई जाएगी। इसके तहत प्रदूषित पानी को बाहर निकालकर फिल्टर किया जाएगा। वहीं फैक्ट्री के जर्जर पाइप, मशीनें और लोहे के ढांचे विशेष केमिकल ट्रीटमेंट और ब्लास्टिंग तकनीक से डीटॉक्स किए जाएंगे।
सीएम ने इसी वर्ष जनवरी में किया था दौरा
परिसर में मौजूद रसायनों का असर आसपास के भूजल तक पहुंच चुका है। ऐसे में इस सफाई अभियान से न केवल यूनियन कार्बाइड परिसर सुरक्षित होगा, बल्कि आसपास की बस्तियों में स्वास्थ्य संबंधी खतरे भी कम हो सकेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इसी वर्ष 17 जनवरी को यूनियन कार्बाइड परिसर का दौरा किया था। उन्होंने यहां करीब 1200 करोड़ रुपये की लागत से हिरोशिमा-नागासाकी की तर्ज पर भव्य स्मारक बनाने की घोषणा की थी। परिसर की सफाई पूरी होने के बाद इस परियोजना का रास्ता भी साफ हो जाएगा।

