अजयारविंद नामदेव, शहडोल। मध्य प्रदेश का आदिवासी बाहुल्य शहडोल जिला एक बार फिर अजीबोगरीब घोटालों को लेकर सुर्खियों में है। चाय में ड्राई फ्रूट्स, मामूली पेंटिंग में सैकड़ों मजदूर और कागजी तालाबों के मामलों के बाद अब जिले में मुरूम घोटाला सामने आया है।
कागजों पर सप्लाई और फर्जी बिल
खनिज विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार शहडोल जिले में मुरूम की एक भी स्वीकृत खदान नहीं है। इसके बावजूद पंचायत स्तर पर विकास कार्यों में लाखों रुपये की मुरूम का इस्तेमाल दर्शाकर भुगतान कर दिया गया। ‘पंचायत दर्पण’ पोर्टल पर अपलोड बिलों ने इस गड़बड़ी की पोल खोल दी है। सोहागपुर की ग्राम पंचायत झिरिया: यहां पीएम जनमन योजना के तहत पेवर ब्लॉक निर्माण के लिए एक हार्डवेयर शॉप (एस.एन. हार्डवेयर) से मुरूम खरीदकर ₹31,400 का भुगतान दर्शाया गया। सीसी रोड निर्माण: एक अन्य बिल में सीसी रोड निर्माण के नाम पर ₹90,720 (जिसमें ₹66,000 की मुरूम शामिल है) का भुगतान मंजूर किया गया।
अधिकारियों के विरोधाभासी बयान
इस मामले में प्रशासनिक अधिकारियों के बयानों ने भ्रम और बढ़ा दिया है। जिला खनिज अधिकारी (राहुल शांडिल्य): उन्होंने स्पष्ट किया कि जिले में मुरूम की कोई भी वैध खदान स्वीकृत नहीं है। संयुक्त आयुक्त विकास (एम.पी. सिंह): उन्होंने कहा कि पंचायतों में प्रावधान के अनुसार काम हो रहा होगा। मुरूम कहाँ से लाई गई और भुगतान कैसे हुआ, इसकी जाँच कराई जाएगी।
उठते गंभीर सवाल
जब जिले में कोई वैध खदान ही नहीं है, तो मुरूम कहाँ से आई? क्या इसके लिए आवश्यक ई-ट्रांजिट पास थे? सबसे बड़ा सवाल यह है कि हार्डवेयर की दुकान से मुरूम की सप्लाई कैसे दिखाई गई? यदि इस मामले की निष्पक्ष जांच होती है, तो यह साफ हो पाएगा कि निर्माण में अवैध सामग्री लगी है या फिर केवल कागजी खेल रचकर सरकारी खजाने को चूना लगाया गया है।
Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m


