जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा (Swarna Kanta Sharma) पर कथित टिप्पणियों को लेकर पहले से ही आपराधिक अवमानना के मामले का सामना कर रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरभ दास (Saurabh Das) की मुश्किलें अब और बढ़ गई हैं। उनके खिलाफ इसी तरह की एक आपराधिक अवमानना शिकायत पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट में भी दायर की गई है। दास के खिलाफ यह शिकायत ऐसे समय में दाखिल हुई है, जब गुरुवार को ही दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने भाजपा नेता गौरव भाटिया की मानहानि शिकायत पर सुनवाई करते हुए CJP के नेताओं को तलब किया है। अदालत ने सौरभ दास के अलावा आशुतोष रांका और अभिजीत दीपके के नाम भी समन जारी किए हैं।

इस बीच बीजेपी के एक नेता ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट का रुख करते हुए दास पर अदालत की अवमानना करने वाली कथित टिप्पणियां करने का आरोप लगाया है। याचिका में पंजाब में लंबित डीए जारी करने से संबंधित हाई कोर्ट के एक आदेश को लेकर की गई टिप्पणियों पर आपत्ति जताई गई है। याचिका के मुताबिक, सौरभ दास ने हाई कोर्ट के 3 अगस्त के आदेश को लेकर ऐसी टिप्पणियां कीं, जिन्हें अदालत की अवमानना के दायरे में बताया गया है। यह आदेश चीफ जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की पीठ ने पारित किया था। उस समय जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा हाई कोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस थे।

याचिका भाजपा युवा मोर्चा के राज्य महासचिव और वकील नितिन गर्ग ने दायर की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि दास ने 20 अगस्त को हाई कोर्ट के एक फैसले की आलोचना की और दावा किया कि रोस्टर का उल्लंघन करते हुए मामले को चुपके से एक अन्य ‘स्वतंत्र बेंच’ से हटा लिया गया। याचिकाकर्ता ने इन टिप्पणियों को अदालत की अवमानना बताते हुए कार्रवाई की मांग की है। गौरतलब है कि अगस्त में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार को निर्देश दिया था कि 31 अगस्त तक सभी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों का लंबित महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) जारी किया जाए। अदालत ने यह भी कहा था कि जब तक लंबित भुगतान नहीं कर दिया जाता, तब तक सरकार बड़े पैमाने पर विज्ञापन अभियान जैसे अनुत्पादक खर्च न करे।

क्या कहा था सौरभ दास ने

20 अगस्त को सौरभ दास ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया था कि जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा ने राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामले को रोस्टर का उल्लंघन करते हुए उस बेंच से वापस ले लिया, जिसकी प्रतिष्ठा स्वतंत्र होने की है। उन्होंने आरोप लगाया था कि 3 अगस्त को अदालत ने पंजाब सरकार के खिलाफ ऐसा आदेश पारित किया, जिससे करीब 20 हजार करोड़ रुपये का आर्थिक बोझ पड़ा। दास ने इस आदेश को जस्टिस मिश्रा की चीफ जस्टिस के रूप में पदोन्नति से भी जोड़ते हुए सवाल उठाया था। उन्होंने कहा था कि कुछ दिन बाद, 6 अगस्त को, तत्कालीन कार्यवाहक चीफ जस्टिस को चीफ जस्टिस के रूप में पदोन्नत कर दिया गया। दास ने सवाल उठाया था कि क्या दोनों घटनाएं महज संयोग हैं। उन्होंने अपने पोस्ट में रोस्टर के कथित उल्लंघन को लेकर पहले के एक मामले का भी जिक्र किया था। दास ने आरोप लगाया था कि पिछले चीफ जस्टिस ने रोस्टर का उल्लंघन कर भाजपा में शामिल हुए सांसदों से जुड़े राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामलों को अपने हाथ में लिया था और बाद में उन्हें सुप्रीम कोर्ट का जज बना दिया गया।

जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा से जुड़े मामले में भी अवमानना केस

सौरभ दास के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा से जुड़ा आपराधिक अवमानना का मामला भी लंबित है। कथित शराब घोटाले से संबंधित मामला जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच के सामने आने के बाद दास ने सोशल मीडिया पर न्यायाधीश को लेकर कई आरोप लगाए थे। अदालत ने इन टिप्पणियों को भ्रामक और दुष्प्रचार से जुड़ा बताते हुए दास के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू की थी। इस मामले में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत आम आदमी पार्टी के कई नेताओं से जुड़े मामले भी संदर्भ में रहे हैं।

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