Odisha Desk, भुवनेश्वर: अयोध्या के राम मंदिर और उत्तराखंड के बद्रीनाथ मंदिर के दानपात्र (हुंडी) से चोरी की घटनाओं के बाद, अब ओडिशा के सुप्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर (श्रीमंदिर) की हुंडी प्रबंधन को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री नरसिंह मिश्रा ने श्रीमंदिर हुंडी के ऑडिट को लेकर कई चौंकाने वाले और विस्फोटक दावे किए हैं, जिसने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है।
2015 से नहीं हुआ ऑडिट: नरसिंह मिश्रा
वरिष्ठ नेता नरसिंह मिश्रा ने एक प्रेस वार्ता में कहा कि नियमों के मुताबिक श्रीमंदिर के दानपात्र (हुंडी) का हर साल ऑडिट होना चाहिए और इसकी विस्तृत रिपोर्ट सरकार के पास जमा की जानी चाहिए। लेकिन वास्तविकता इसके बिल्कुल उलट है। उन्होंने आरोप लगाया कि साल 2015 के बाद से श्रीमंदिर की हुंडी का कोई भी ऑडिट रिपोर्ट सामने नहीं आया है।
2015 की रिपोर्ट में थी भारी अनियमितता
कांग्रेस नेता ने आगे एक बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि 2015 में जो आखिरी ऑडिट रिपोर्ट आई थी, उसमें भारी वित्तीय अनियमितताएं और गड़बड़ियां पाई गई थीं। इसके बाद से ऑडिट रिपोर्ट का सामने न आना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने आशंका जताई है कि इतने सालों में भक्तों द्वारा चढ़ाए गए दान में भारी हेरफेर की गई है।
विशेष जांच दल (SIT) के गठन की मांग
श्रीमंदिर की हुंडी प्रबंधन में पारदर्शिता लाने और सच को सामने लाने के लिए नरसिंह मिश्रा ने सरकार से एक विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की पुरजोर मांग की है। उन्होंने कहा कि:
सरकार तुरंत एक एसआईटी का गठन करे जो पूरे हुंडी प्रबंधन और ऑडिट प्रक्रिया की गहन जांच करे। दान राशि से जुड़ी अनियमितताओं के पीछे जो भी दोषी पाए जाएं, उनके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
राजनीतिक गलियारों में हलचल: महाप्रभु जगन्नाथ के मंदिर से जुड़े इस संवेदनशील वित्तीय मामले और कांग्रेस के इन आरोपों के बाद ओडिशा की राजनीति गरमा गई है। विपक्ष अब सरकार को घेरने की तैयारी में है, वहीं आम भक्तों के बीच भी हुंडी की सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर चिंता बढ़ गई है।

