लवकुश बैरागी, आगर मालवा। मध्य प्रदेश की आगर मालवा नगर पालिका की राजनीति में इन दिनों जबर्दस्त हाई-वोल्टेड सियासी ड्रामा देखने को मिल रहा है। अपनी ही सरकार के राजस्व अधिकारियों की प्रताड़ना से तंग आकर आगर नगर पालिका अध्यक्ष सहित भारतीय जनता पार्टी के कई पार्षदों ने प्रभारी मंत्री के दौरे के बीच सामूहिक इस्तीफा सौंप दिया है। इस सियासी घटनाक्रम के बाद से जिले की राजनीति में हड़कंप मच गया है।

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सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुआ सियासी भूचाल

इस पूरे विवाद की पटकथा बीजेपी जिला महामंत्री मयंक राजपूत के एक सोशल मीडिया पोस्ट से लिखी गई। मयंक राजपूत ने सोशल मीडिया पर लिखा कि:

‘हमारे सामान्य माननीय से आग्रह है अपने प्रिय राजस्व अधिकारियों के लिए 56 भोग का आयोजन करें क्योंकि आज आगर नगर पालिका होगी भंग’

इस पोस्ट के बाद से ही शहर में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। इसी बीच जिले के प्रभारी मंत्री नागर सिंह चौहान के प्रस्तावित दौरे के दौरान आगर सर्किट हाउस पहुंचे। जिनके सामने बीजेपी पार्षदों ने सामूहिक इस्तीफे का ऐलान कर दिया।

बीजेपी में गुटबाजी!

सामूहिक इस्तीफे के बाद बीजेपी के भीतर की गुटबाजी खुलकर सामने आ गई है। परिषद के कुछ बीजेपी पार्षदों ने इस इस्तीफे से खुद को अलग करते हुए कहा कि संगठन की तरफ से ऐसा कोई निर्देश जारी नहीं हुआ है कि सभी पार्षदों को सामूहिक इस्तीफा देना है।

मामले के तूल पकड़ते ही जिले के प्रभारी मंत्री नागर सिंह चौहान ने स्थिति को संभालते हुए कहा कि:

‘नगर पालिका पर भारतीय जनता पार्टी का ही कब्जा है और इस्तीफे जैसी बात महज एक अफवाह है।’

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कांग्रेस का हमला: “जनहित नहीं, निजी स्वार्थ की लड़ाई है”

इस पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता गुड्डू लाला ने बीजेपी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि:

“बीजेपी पार्षदों का यह सामूहिक इस्तीफा नगर हित, विकास या जनता की भलाई के लिए नहीं है। यह केवल अपनी ही सरकार और पार्टी पर दबाव बनाकर अपना निजी स्वार्थ सिद्ध करने की कोशिश है, जो पूरी नहीं हो पा रही है। अगर वाकई निष्ठा से इस्तीफा देना होता, तो नियमानुसार कलेक्टर को सौंपा जाता, न कि प्रभारी मंत्री के सामने ड्रामा किया जाता।”

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