रांची। झारखंड में भर्ती परीक्षाओं और नियुक्तियों को रद्द किए जाने के फैसले पर कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने सरकार का पक्ष स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने यह निर्णय संस्थाओं की विश्वसनीयता और परीक्षा व्यवस्था की पवित्रता बनाए रखने के लिए लिया है।
मंत्री ने कहा कि कैबिनेट की विशेष बैठक में TDPL की भूमिका को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। जांच में सामने आए तथ्यों और पूरे मामले की समीक्षा के बाद ही संबंधित परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया गया।उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी के साथ अन्याय करना नहीं, बल्कि भर्ती प्रक्रिया में लोगों का भरोसा बनाए रखना है।
पहले जांच में सामने नहीं आए थे सभी तथ्य
पूर्व में कोर्ट के आदेश के बाद JSSC-CGL के जरिए नियुक्तियां किए जाने के सवाल पर शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि उस समय जांच में सभी तथ्य सामने नहीं आए थे। इसलिए न्यायालय के आदेश के अनुरूप सरकार ने नियुक्तियां की थीं।
मंत्री के मुताबिक, अब CID की जांच में अभय तिवारी की भूमिका सामने आ रही है। उन्होंने दावा किया कि जांच के दौरान परीक्षा में पैसों के लेनदेन की बात भी सामने आई है।
दो हजार नियुक्तियों में संदिग्धों की पहचान मुश्किल
मंत्री ने कहा कि करीब दो हजार नियुक्तियों में यह पहचान करना आसान नहीं था कि कौन अभ्यर्थी कथित गड़बड़ी से प्रभावित हुआ और कौन नहीं। इसी वजह से सरकार ने JSSC-CGL के साथ उन अन्य परीक्षाओं को भी रद्द करने का फैसला लिया, जिनमें TDPL की भूमिका रही थी।
हाईकोर्ट में चुनौती पर बोलीं- यह स्वाभाविक है
सरकार के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल किए जाने को लेकर कृषि मंत्री ने कहा कि प्रभावित पक्षों की ओर से न्यायालय जाना स्वाभाविक है। अब पूरे मामले में न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

