चंडीगढ़। हरियाणा के चर्चित AJL (एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड) प्लॉट आवंटन मामले में पूर्व मुख्यमंत्री Bhupinder Singh Hooda और अन्य आरोपियों की कानूनी मुश्किलें फिर से बढ़ सकती हैं। प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) ने पंचकूला स्थित विशेष PMLA अदालत के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले को समाप्त कर दिया गया था। ED ने इस आदेश को रद्द करने के साथ-साथ उस पर तुरंत रोक लगाने की भी मांग की है और मामला Punjab and Haryana High Court में पहुंच गया है।
मामले में क्या हुआ था?
इस केस में अहम मोड़ तब आया जब 25 फरवरी 2026 को Punjab and Haryana High Court ने मूल आपराधिक मामले में आरोपियों को राहत दी थी। इसके बाद पंचकूला की विशेष PMLA अदालत ने यह कहते हुए मनी लॉन्ड्रिंग की कार्यवाही समाप्त कर दी कि जब आधारभूत अपराध ही खत्म हो गया है, तो उससे जुड़ा धनशोधन मामला भी आगे नहीं चल सकता।
हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि यदि भविष्य में Supreme Court of India मूल मामले को दोबारा बहाल करता है, तो ED फिर से जांच शुरू कर सकती है।
ED की आपत्ति
Enforcement Directorate का कहना है कि PMLA अदालत ने कानून की गलत व्याख्या की है। एजेंसी के अनुसार मनी लॉन्ड्रिंग एक स्वतंत्र अपराध है और इसकी जांच केवल मूल FIR पर निर्भर नहीं होती। ED ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर कार्यवाही रोकी जाती है तो कुर्क संपत्ति से जुड़े मामलों और जांच पर गंभीर असर पड़ सकता है।
इसी बीच Central Bureau of Investigation भी पहले ही इस मामले में हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे चुकी है।
अगली कार्रवाई
मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को नोटिस जारी किया है। Bhupinder Singh Hooda और अन्य आरोपियों को 8 जुलाई तक जवाब दाखिल करना होगा।

