लखनऊ. उत्तर प्रदेश में इन दिनों बिजली कटौती का मुद्दा तुल पकड़ा हुआ है. विपक्ष लगातार सरकार को घेर रही है. जबकि शासन और विभागीय मंत्री स्थिति सामान्य बता रहे हैं. उनका दावा है कि अधिक से अधिक विद्युत आपूर्ती का प्रयास सरकार कर रही है. इसे लेकर अखिलेश यादव ने एक बार फिर निशाना साधा है. उन्होंने एक्स पर लिखा कि ‘उप्र में असहनीय ‘महा विद्युत आपदा’ की वजह से लगातार बढ़ते आक्रोश से बचने के लिए भयभीत भाजपाई विधायक-सांसद दिखावटी चिट्ठी के रूप में जिस ‘कागजी कवच’ से खुद को बचाना चाह रहे हैं, वो चिट्ठी दरअसल अपनी सरकार को लिखा कोई ‘जन हित का पत्र’ नहीं है बल्कि भाजपा रूपी डूबते जहाज को छोड़कर विपक्ष से आगामी चुनावों में टिकट पाने के लिए ‘आवेदन पत्र’ है.’
अखिलेश ने आगे लिखा ‘हमारे गठबंधन में ऐसे नेताओं के लिए कोई जगह नहीं है, जो जनता को दुख-दर्द और दिक़्क़तों के सिवा कुछ नहीं देते हैं. इस जानलेवा गर्मी में परिवारों में बड़े बुज़ुर्गों, बीमारों, बच्चों और खाने-पानी की व्यवस्था में झुलसती महिलाओं की क्या दुर्दशा हो रही है, ये केवल परिवारवाले ही समझ सकते हैं. कभी आपदा में अवसर ढूंढनेवालों ने, अवसर की जगह जिस ‘अफसर’ को ढूंढा था वो अफसर अब स्वयं आपदा साबित हो रहा है. समस्या का समाधान पूछने पर दोनों हाथ खड़ा करके नारा लगाकर बच निकलनेवालों के रहते समस्या नहीं सुलझेगी. भाजपा के डबल इंजन की इस आपसी टकराहट का खामियाजा जनता क्यों भुगते?’
इसे भी पढ़ें : सत्ताइस से संग्राम से पहले UP में RSS की एंट्री! लखनऊ पहुंचे भागवत, योगी से मुलाकात की चर्चा, चलगे बैठकों का दौर
सपा प्रमुख ने लिखा ‘किसी के लिए ये बड़ा मौका है कि वो पूरी तरह से नाकाम हो चुके किसी ‘दूत-मंत्री’ को हटा दे मतलब बहुत समय से चुभ रहे इस कांटे को निकाल दे अर्थात इस बार आपदा में वो किसी को बाहर का रास्ता दिखाने का अवसर ढूंढ ले. ऐसे में माननीय पर किसी के खिलाफ दुर्भावनावश काम करने का आरोप भी कोई नहीं लगा पाएगा. उसके बाद मुख्य जी को अपना मंत्रिमंडल विस्तार करने और उन बेचारे सहानुभूति के पात्रों में से किसी एक ‘घाटहीन’ को समायोजित करने का मौका भी मिल जाएगा, जो सत्तासुख के लालच में अपनी अंतरात्मा से झूठ बोलकर भी केवल हाथ मलते रह गए हैं और अपनी राजनीति के खत्म होने पर पछतावे के आंसू भी नहीं बहा पा रहे हैं.’
उप्र की भाजपा सरकार भी जानती है कि अब वो कभी वापस नहीं आएगी, इसीलिए वो जनता की मुश्किलों और मांगों को पूरी तरह नजरअंदाज करके बस अपने खजाने भरने में लगी है. जन-जन कहे आज का, भार बन गई भाजपा!

