चंडीगढ़। विदेश से मेडिकल शिक्षा लेने की तैयारी कर रहे छात्रों और अभिभावकों के लिए अहम खबर है। हरियाणा चिकित्सा परिषद ने ऐसे आठ मेडिकल संस्थानों की सूची जारी की है, जिनसे एमबीबीएस या अन्य मेडिकल डिग्री प्राप्त करने वाले छात्रों को राज्य में डॉक्टर के रूप में पंजीकरण और प्रैक्टिस की अनुमति नहीं मिलेगी।

हरियाणा चिकित्सा परिषद के रजिस्ट्रार डॉ. मनदीप कुमार सचदेवा ने राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के निर्देशों के आधार पर यह चेतावनी जारी की है। परिषद के अनुसार ये संस्थान विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट लाइसेंशिएट रेगुलेशंस-2021 समेत निर्धारित मानकों का पालन नहीं कर रहे हैं।

परिषद ने स्पष्ट किया है कि इन संस्थानों से पढ़ाई करने वाले छात्रों को भविष्य में डिग्री की मान्यता, मेडिकल रजिस्ट्रेशन, लाइसेंसिंग एग्जाम में शामिल होने और क्लिनिकल ट्रेनिंग से जुड़ी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा आर्थिक और शैक्षणिक नुकसान की आशंका भी बनी रहती है।

विदेशी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लेने से पहले मान्यता जांचें
छात्रों और अभिभावकों को सलाह दी गई है कि किसी भी विदेशी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लेने से पहले उसकी मान्यता, एनएमसी नियमों के अनुपालन और एफएमजीएल रेगुलेशंस-2021 की पूरी जांच-पड़ताल करें। परिषद ने अनवेरिफाइड एजेंटों और बिचौलियों से सावधान रहने की भी अपील की है।

यह विदेशी चिकित्सा संस्थान किए गए प्रतिबंधित
सेंट्रल अमेरिकन हेल्थ एंड साइंसेज यूनिवर्सिटी, बेलीज
कोलंबस सेंट्रल यूनिवर्सिटी, बेलीज
वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी आफ हेल्थ एंड साइंसेज, बेलीज
चिरचिक ब्रांच आफ ताशकंद स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी, उज्बेकिस्तान
बुखारा स्टेट मेडिकल इंस्टीट्यूट, उज्बेकिस्तान
समरकंद स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी, उज्बेकिस्तान
ताशकंद स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी , उज्बेकिस्तान
टीआइटी इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंसेज, बेंगलुरु (टीएसएमयू उज्बेकिस्तान का आफशोर कैंपस)

परिषद ने छात्रों से अपील की है कि विदेश में मेडिकल शिक्षा से जुड़ी किसी भी भ्रामक या अवैध पेशकश की जानकारी संबंधित अधिकारियों को दें और बिना जांच-पड़ताल किसी भी संस्थान में प्रवेश न लें।