अली अहमद के झांसी से प्रयागराज लाए जाने के दौरान बड़ौरी टोल प्लाजा पर हुए विवाद के मामले में आरोपी असजद मसीह को हाईकोर्ट से तत्काल राहत नहीं मिली. अदालत ने राज्य सरकार को चार सप्ताह में विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है.

प्रयागराज. अली अहमद को झांसी से प्रयागराज लाते समय काफिले से जुड़े टोल विवाद के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरोपी असजद मसीह को तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया है. फतेहपुर के बड़ौरी टोल प्लाजा पर टोल कर्मचारियों से अभद्रता और बिना शुल्क दिए निकलने के आरोप में दर्ज प्राथमिकी रद्द कराने के लिए आरोपी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी.

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अजय भनोट और न्यायमूर्ति डीसी सामंत की खंडपीठ ने की. याचिकाकर्ता ने खुद को निर्दोष बताते हुए दावा किया कि उसे मामले में गलत तरीके से फंसाया गया है.

पेरोल शर्तों का मामला

राज्य सरकार की ओर से अपर शासकीय अधिवक्ता परितोष कुमार मालवीय ने अदालत के सामने अपना पक्ष रखा. उन्होंने बताया कि अली अहमद को पेरोल देते समय अदालत ने भीड़ जुटाने, जुलूस निकालने और सोशल मीडिया पर रील बनाने समेत कई शर्तें लगाई थीं.

बताया गया कि दोनों भाइयों ने जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इन शर्तों का पालन करने का भरोसा दिया था. इसके बावजूद झांसी से प्रयागराज के दौरान पुलिस वाहनों के पीछे दर्जनों समर्थकों का काफिला चलने की बात अदालत के सामने रखी गई.

टोल प्लाजा पर विवाद

राज्य सरकार की दलील के अनुसार, काफिले में शामिल लोगों ने बड़ौरी टोल प्लाजा पर कर्मचारियों के साथ गाली-गलौज की और बिना टोल शुल्क दिए वहां से निकल गए. टोल प्लाजा के मैनेजर ने सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और सरकारी राजस्व को नुकसान होने की शिकायत दर्ज कराई थी.

हाईकोर्ट ने मामले से जुड़े इन तथ्यों को गंभीर माना. अदालत ने आरोपी को किसी भी तरह की अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया.

चार सप्ताह में जवाब

अदालत ने राज्य सरकार को मामले में चार सप्ताह के भीतर अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. प्राथमिकी रद्द करने की आरोपी की याचिका पर फिलहाल तत्काल राहत नहीं दी गई है.