प्रयागराज. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने देवरिया के चंदन राजभर को पांच दिनों तक अवैध पुलिस हिरासत में रखने के मामले में बड़ा आदेश दिया है. कोर्ट ने राज्य सरकार को उन्हें 1.25 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया है. अदालत ने कहा कि जांच अधिकारी ने कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना उन्हें हिरासत में रखा और अपने अधिकारों का दुरुपयोग किया. कोर्ट ने यह भी साफ किया कि मुआवजा मिलने के बाद भी चंदन राजभर पुलिस विभाग के खिलाफ दीवानी मुकदमा कर सकते हैं.
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बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनाया फैसला
न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की पीठ ने ज्ञांती देवी और दो अन्य की ओर से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका स्वीकार की. याचिका में चंदन राजभर की रिहाई की मांग की गई थी. कोर्ट ने अवैध हिरासत के हर दिन के लिए 25 हजार रुपये के हिसाब से मुआवजा देने का आदेश दिया.
युवती के साथ शादी कर पुणे चले गए थे दोनों
मामले के मुताबिक, देवरिया के सलेमपुर थाने में 18 जुलाई 2026 को भारतीय न्याय सुरक्षा संहिता की धारा 87 के तहत प्राथमिकी दर्ज हुई थी. शिकायतकर्ता महिला ने आरोप लगाया था कि चंदन राजभर उसकी 18 वर्षीय बेटी को लेकर चला गया है. याचिकाकर्ताओं के मुताबिक, दोनों ने बिहार के सिवान स्थित दुर्गा मंदिर में शादी कर ली थी. इसके बाद वे पुणे चले गए और पति-पत्नी की तरह रहने लगे.
28 अगस्त से 2 सितंबर तक हिरासत में रखने का आरोप
याचिकाकर्ताओं के अनुसार, 24 अगस्त की रात युवती के पिता कुछ पुलिसकर्मियों के साथ पुणे स्थित दंपति के घर पहुंचे. पुलिस दोनों को हिरासत में लेकर थाने ले आई. आरोप है कि चंदन को 28 अगस्त से 2 सितंबर तक हिरासत में रखा गया. उसकी गिरफ्तारी से जुड़े दस्तावेज 2 सितंबर को तैयार किए गए.
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जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू
राज्य सरकार के वकील ने कोर्ट को बताया कि क्षेत्राधिकारी की 21 अक्टूबर की जांच रिपोर्ट में जांच अधिकारी दीप नारायण यादव को दोषी माना गया. रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने चंदन को जानबूझकर हिरासत में रखा. इसके बाद देवरिया के पुलिस अधीक्षक ने उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी. हाईकोर्ट ने कहा कि जांच में दोष साबित होने पर अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई पर विचार किया जाना चाहिए.

