प्रयागराज. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बनारस में गंगा नदी पर इफ्तार पार्टी करने और मांसाहार करने वाले आठ आरोपियों को जमानत दे दी है. आरोपियों ने हलफनामा दाखिल कर अदालत से माफी मांगी और कहा कि वे अपने कृत्य के लिए शर्मिंदा हैं. आरोपियों ने हलफनामें में ये भी लिखा कि भविष्य में ऐसी गलती नहीं होगी. इस आश्वासन को आधार मानते हुए न्यायालय ने उन्हें राहत दे दी है.
न्यायमूर्ति राजीव लोचन शुक्ल ने मोहम्मद आजाद अली, मोहम्मद तहसीम, निहाल अफरीदी, मोहम्मद तौसीफ और मोहम्मद अनस की जमानत याचिका मंजूर की. वहीं न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा ने मोहम्मद समीर, मोहम्मद अहमद रजा और मोहम्मद फैजान को जमानत दी. सुनवाई के दौरान आरोपियों की ओर से अदालत में शपथपत्र दाखिल कर कहा गया कि उनका उद्देश्य किसी की धार्मिक भावना आहत करना नहीं था. साथ ही यह भी बताया गया कि किसी भी आरोपी का आपराधिक इतिहास नहीं है.
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इधर दूसरी ओर राज्य सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने धार्मिक स्थलों की पवित्रता से जुड़े कई महत्वपूर्ण न्यायिक फैसलों का हवाला देते हुए जमानत का विरोध किया. हालांकि, अदालत ने कहा कि गंगा केवल हिंदुओं की ही नहीं, बल्कि पूरे देश की आस्था का प्रतीक है और हर धर्म के लोग इसका सम्मान करते हैं. अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी को भी गंगा को अपवित्र करने का अधिकार नहीं है, लेकिन आरोपियों के माफीनामे और अंडरटेकिंग को देखते हुए उन्हें जमानत दी जा रही है.

