प्रयागराज. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बिजनौर में गोगा नवमी मेले के प्रबंधन को लेकर तत्कालीन जिलाधिकारी के आदेश पर रोक लगा दी है. कोर्ट ने कहा कि जिलाधिकारी अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर सर्वशक्तिमान की तरह काम नहीं कर सकते. अदालत ने फियोना गांव में पारंपरिक मेला आयोजित करने की अनुमति भी दी है. हालांकि, इसके लिए जरूरी मंजूरी लेनी होगी.
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डीएम ने ग्राम सभा को सौंपा था मेले का प्रबंधन
मामला 29 अगस्त 2025 को जारी तत्कालीन डीएम जसजीत कौर के आदेश से जुड़ा है. इस आदेश के तहत गोगा नवमी मेले का प्रबंधन ग्राम सभा को सौंप दिया गया था. मेले से होने वाली कमाई भी ग्राम सभा को देने का फैसला किया गया था. इसके लिए राजस्व अधिकारियों की तीन सदस्यीय समिति बनाई गई थी. जसजीत कौर का आदेश जारी होने के अगले महीने तबादला हो गया था. इसके बाद आईएएस उमेश प्रताप सिंह ने बिजनौर के जिलाधिकारी का पद संभाला था.
हाईकोर्ट में दी गई थी आदेश को चुनौती
डीएम के फैसले को सार्वजनिक आर्य इंटर कॉलेज की प्रबंधन समिति और एक अन्य पक्ष ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. याचिकाकर्ताओं ने कहा कि पारंपरिक मेले के आयोजन के उनके अधिकार पर सवाल उठाया जा रहा है. इस संबंध में उन्होंने पहले ही ग्राम सभा और कुछ अन्य पक्षों के खिलाफ दीवानी मुकदमा भी दायर किया था.
दो जजों की पीठ ने की सुनवाई
मामले की सुनवाई जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस विवेक सरन की पीठ ने की. कोर्ट ने पाया कि डीएम ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर आदेश जारी किया था. अदालत के अनुसार, इस आदेश को जारी करने के लिए जिलाधिकारी के पास कानूनी अधिकार नहीं था.
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राज्य सरकार को दो सप्ताह में देना होगा जवाब
हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए डीएम के आदेश को निलंबित कर दिया. साथ ही राज्य सरकार के प्रतिवादियों को जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है. कोर्ट ने साफ किया कि फियोना गांव में मेला आयोजित किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए संबंधित विभागों से जरूरी मंजूरी लेनी होगी. इस फैसले से मेले के प्रबंधन और आयोजन को लेकर चल रहा विवाद फिर चर्चा में आ गया है.

