नकली दवाओं (fake medicine ) के करोड़ों रुपये के रैकेट से जुड़े एक बड़े मामले में रिश्वत मांगने के आरोपों ने अब एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी को भी जांच के दायरे में ला दिया है। इस मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने दिल्ली पुलिस (Delhi Police) के इंस्पेक्टर को कथित तौर पर रिश्वत की पहली किस्त लेते हुए गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी के अनुसार, यह मामला करीब 3 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगने से जुड़ा बताया जा रहा है। इसी जांच के दौरान एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी की भूमिका पर भी सवाल खड़े हुए हैं, जिनके बारे में आरोप है कि वे इस नेटवर्क से जुड़े संपर्कों के संपर्क में थे।

पुडुचेरी प्रशासन की सिफारिश पर चल रही जांच

जांच एजेंसियों के अनुसार, पुडुचेरी पुलिस और ड्रग कंट्रोल विभाग को पिछले वर्ष सितंबर और दिसंबर के बीच ऐसी कई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स का पता चला था, जो एक दर्जन से अधिक ब्रांड की नकली दवाएं तैयार कर रही थीं। इन यूनिट्स में बिना अनुमति और नियमों के उल्लंघन के साथ बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जा रहा था। आरोप है कि एन. राजा इस पूरे नेटवर्क का हिस्सा था और उसके जरिए देशभर में कथित तौर पर हजारों करोड़ रुपये की नकली दवाओं का कारोबार किया गया। जांच एजेंसियां अब इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि यह रैकेट किन-किन राज्यों तक फैला था और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।

नकली दवाओं से जुड़े कथित बड़े रैकेट की जांच में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने सोमवार को एक नया मामला दर्ज किया है। इस केस में दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह, आरोपी एन. राजा, उनके सहयोगी राजकुमार तथा अज्ञात सरकारी कर्मचारियों और निजी व्यक्तियों को नामजद किया गया है। जांच एजेंसी के अनुसार, यह मामला उन सूचनाओं के आधार पर दर्ज किया गया है, जिनमें आरोप है कि कुछ लोगों द्वारा CBI मामलों में अनुचित राहत दिलाने की बात कही गई थी। इसी संदर्भ में कथित रिश्वत और प्रभाव के इस्तेमाल से जुड़ी जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है।

नए FIR में क्या आरोप

CBI ने दर्ज नई FIR में कई अहम आरोप शामिल किए हैं। एफआईआर के अनुसार, आरोपी राजकुमार ने इस पूरे नेटवर्क में एन. राजा और दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह के बीच बिचौलिए की भूमिका निभाई थी। जांच एजेंसी का दावा है कि दोनों के बीच संपर्क स्थापित कराने में राजकुमार की अहम भूमिका रही। सीबीआई के मुताबिक, 14 मई को एन. राजा और राजकुमार ने दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट के पास एयरोसिटी क्षेत्र में इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह से मुलाकात की थी। इसके बाद प्रदीप सिंह कथित तौर पर दोनों को पास ही स्थित एक अज्ञात वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के कार्यालय में लेकर गया, जहां उनकी मुलाकात कराई गई। एफआईआर में यह भी आरोप लगाया गया है कि इस बैठक के दौरान उस वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने एन. राजा को आश्वासन दिया कि वह सीबीआई में अपने संपर्कों और प्रभाव का इस्तेमाल कर मामलों में उन्हें राहत दिला सकता है।

1.5 करोड़ रुपए के एडवांस की मांग

FIR में कहा गया है कि एक “सीनियर सरकारी अधिकारी” सीबीआई के लंबित मामलों में मदद दिलाने के बदले लगभग 3 करोड़ रुपये की रिश्वत लेने पर कथित रूप से सहमत हुआ था। इसमें यह भी आरोप है कि अधिकारी ने इस सौदे के तहत 1.5 करोड़ रुपये की अग्रिम (एडवांस) राशि की मांग की थी। CBI के अनुसार, आरोपी राजकुमार के वडोदरा जाने से पहले ही एन. राजा ने कथित तौर पर इस रकम का इंतजाम कर लिया था। इसके बाद वडोदरा में राजकुमार ने दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह से मुलाकात की और रिश्वत की रकम को दिल्ली में मौजूद सरकारी अधिकारियों तक पहुंचाने के तरीकों पर चर्चा की। जांच एजेंसी का दावा है कि इसके बाद दोनों आरोपी दिल्ली पहुंचे, जहां कथित तौर पर इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के साथ आगे की योजना पर बातचीत हुई।

हवाला ऑपरेटर से मदद ली

जांच के अनुसार, आरोपी एन. राजा ने अपनी पत्नी को कथित तौर पर बताया था कि रिश्वत की एडवांस राशि जल्द से जल्द पहुंचाई जानी चाहिए और इसके लिए पैसे का इंतजाम तैयार रखने को कहा गया था। सीबीआई का दावा है कि राजा ने चेन्नई में एक हवाला ऑपरेटर से संपर्क किया और उसके जरिए लगभग 1 करोड़ रुपये की राशि दिल्ली भेजने की व्यवस्था की गई। यह रकम कथित तौर पर एडवांस रिश्वत के रूप में भेजी जा रही थी। एजेंसी के अनुसार, यह पैसा 8 जून को दिल्ली के चांदनी चौक इलाके में दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह को सौंपे जाने की योजना थी। हालांकि, इससे पहले ही जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क पर नजर बनाए हुए थीं।

पुडुचेरी में सामने आए बड़े नकली दवा निर्माण और सप्लाई नेटवर्क से जुड़े मामले में जांच अब और गहराती जा रही है। यह पूरा मामला पिछले वर्ष तब उजागर हुआ था जब पुडुचेरी पुलिस और CB-CID ने संयुक्त कार्रवाई कर इस अवैध कारोबार का भंडाफोड़ किया था। छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में नकली दवाएं, दवा निर्माण का कच्चा माल और पैकिंग सामग्री बरामद की गई थी। जांच में यह भी सामने आया था कि यह नेटवर्क लंबे समय से नकली दवाओं का उत्पादन कर उन्हें विभिन्न हिस्सों में सप्लाई कर रहा था।

मामले की गंभीरता और इसके संभावित व्यापक नेटवर्क को देखते हुए इसकी जांच बाद में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंप दी गई। सीबीआई ने इस साल मार्च में मुख्य आरोपी एन. राजा के खिलाफ नया केस दर्ज कर जांच को आगे बढ़ाया। फिलहाल सीबीआई इस मामले में दो स्तर पर जांच कर रही है। पहली जांच नकली दवा रैकेट में शामिल लोगों की भूमिका पर केंद्रित है, जबकि दूसरी जांच कथित तौर पर इस केस में राहत दिलाने के नाम पर सक्रिय रिश्वत नेटवर्क की पड़ताल कर रही है। एजेंसी यह भी जांच कर रही है कि क्या इस पूरे प्रकरण में किसी वरिष्ठ सरकारी अधिकारी या अन्य प्रभावशाली व्यक्ति की भूमिका रही है, और क्या जांच को प्रभावित करने या आरोपियों को बचाने के लिए सरकारी तंत्र का इस्तेमाल करने की कोशिश की गई थी।

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m