कुंदन कुमार, पटना। राष्ट्रीय लोक मोर्चा की ओर से आज 7 जून 2026 को पटना के रविन्द्र भवन में राज्य स्तरीय अधिवेशन और राज्य परिषद सदस्यों व डेलिगेट्स की बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में आलोक सिंह को पार्टी का नया प्रदेश अध्यक्ष चुना गया। बता दें कि पार्टी प्रदेश अध्यक्ष पद आलोक कुमार सिंह और प्रशांत कुमार पंकज दो नाम सामने आ रहे थे। इन दोनों प्रत्याशियों ने चुनाव के लिए उपेंद्र कुशवाहा को अधिकृत किया था, जिसके बाद उपेंद्र कुशवाहा ने आलोक सिंह को पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया।

13 जून को राष्ट्रीय अध्यक्ष का होना है चुनाव

आरएलएम प्रदेश अध्यक्ष पद हेतु आज चुनाव संपन्न हुआ दोनों प्रत्याशी ने उपेंद्र कुशवाहा को अधिकृत किया था उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि आलोक सिंह पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बने हैं। सभी साथी साथ मिलकर विचारधारा को आगे लेकर जाएंगे और पार्टी को मजबूत करेंगे। प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव होने के बाद 13 जून को नई दिल्ली में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव होना है। इन कार्यक्रमों को लेकर कार्यकर्ताओं में काफी उत्साह का माहौल देखने को मिल रहा है।

MLC चुनाव में सीट नहीं मिलने पर कही ये बात

इस मौके पर उपेंद्र कुशवाहा के बेटे और बिहार सरकार में मंत्री दीपक प्रकाश ने एमएलसी चुनाव में सीट नहीं मिलने पर कहा कि, विधान परिषद चुनाव में शीर्ष नेतृत्व जो फैसला लेगा हम लोगों के लिए सर्वमान्य है, जो भी प्रत्याशी एनडीए के बने हैं, सभी को शुभकामनाएं। वहीं, उपेंद्र कुशवाहा ने विधान परिषद चुनाव को लेकर कहा कि, ठीक है, हो जाएगा।

18 जून को होना है 10 सीटों पर चुनाव

गौरतलब है कि बिहार 10 सीटों के लिए 18 जून को चुनाव होना है, जिसके लिए कल 8 जून को नामांकान का आखिरी दिन है। एमएलसी चुनाव के लिए एनडीए में सीट का बंटवारा हो चुका है। बीजेपी-जदयू ने 4-4 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। वहीं, एक सीट पर चिराग की पार्टी एलजेपी आर ने अपने उम्मीदवार उतारे हैं। जबकि राजद एक सीट पर उतारेगा। ऐसे में एमएलसी चुनाव में आरएलएम को सीट नहीं मिला है, जिससे दीपक प्रकाश के मंत्री बने रहने पर संकट आ गया है।

किसी सदन का सदस्य नहीं हैं दीपक प्रकाश

गौरतलब है कि बिहार सरकार में दीपक कुमार और निशांत कुमार बिना किसी सदन का सदस्य रहते हुए मंत्री बने हैं। जदयू से निशांत कुमार को एएमलसी चुनाव का टिकट तो मिल गया है, लेकिन दीपक प्रकाश को टिकट नहीं मिल पाया है। नियम के मुताबिक मंत्री बनने के 6 महीने के अंदर विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना जरूरी होता है।

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