Rajasthan News: एक तरफ राजस्थान सरकार बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ जान बचाने वाले डॉक्टर ही सिस्टम की मार झेल रहे हैं। अलवर जिला अस्पताल में तैनात सीनियर रेजिडेंट डॉ. ज्योति पिछले 8 महीनों से बिना वेतन के काम कर रही हैं। हालत यह है कि उनके पास मोबाइल रिचार्ज और कमरे का किराया देने तक के पैसे नहीं बचे हैं।

डॉ. ज्योति का कहना है कि उन्हें 29 अगस्त 2025 से अब तक उन्हें वेतन के नाम पर एक रुपया भी नसीब नहीं हुआ है। डॉ. ज्योति ने आरोप लगाते हुए बताया कि भरतपुर में वेतन जारी करने के बदले उनसे रिश्वत यानी सुविधा शुल्क मांगा जा रहा है।
पूरा मामला तकनीकी पेच और अधिकारियों की लापरवाही में उलझा हुआ है। डॉ. ज्योति ने पहले भरतपुर में जॉइन किया था, लेकिन 2 महीने बाद उनका ट्रांसफर अलवर हो गया। अब नियम यह है कि उनका मूल वेतन भरतपुर से ही बनना है।
पिछले 6 महीनों से वे अलवर में दिन-रात सेवाएं दे रही हैं, लेकिन भरतपुर पीएमओ (PMO) ऑफिस उनकी फाइल को निदेशालय में लंबित बताकर टाल रहा है। इस बारे में भरतपुर पीएमओ डॉ. नगेंद्र भदौरिया ने कहा कि उन्हें इस मामले की कोई जानकारी ही नहीं है। वहीं महिला डॉक्टर का कहना है कि उनके पास मोबाइल रिचार्ज कराने तक के लिए पैसे नहीं हैं।
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