राम कुमार यादव, अंबिकापुर। राजीव गांधी शिक्षा मिशन अंबिकापुर में करीब 15 वर्ष पुराने करोड़ों रुपये के स्कूल फर्नीचर खरीदी प्रकरण में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने बड़ी कार्रवाई की है। साल 2010-11 में अविभाजित सरगुजा जिले के अंतर्गत सूरजपुर एवं बलरामपुर-रामानुजगंज क्षेत्र की पूर्व माध्यमिक शालाओं के लिए फर्नीचर खरीदी के नाम पर हुए करीब ₹2.70 करोड़ के प्रकरण में अनियमितता और शासकीय राशि के दुरुपयोग की जांच के बाद तत्कालीन जिला परियोजना समन्वयक सत्यप्रकाश पाण्डेय (एस.पी. पाण्डेय) और मेसर्स दर्शन फेब्रिकेशन एवं आकृति प्रिंटिंग प्रेस के संचालक संजय पटेल को गिरफ्तार किया गया है। दोनों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।

जांच में सामने आया है कि मेसर्स दर्शन फेब्रिकेशन के नाम से वास्तविक रूप से फर्नीचर की आपूर्ति किए बिना ही आपूर्ति दर्शाई गई और उसके आधार पर बिल प्रस्तुत कर शासकीय भुगतान प्राप्त किया गया। विवेचना में इस अनियमित भुगतान के चलते शासन को ₹67,15,814 की आर्थिक क्षति होना पाया गया है।

2010-11 में मिला था ₹2.70 करोड़ का आवंटन

मामला वर्ष 2010-11 का है। उस समय कार्यालय राजीव गांधी शिक्षा मिशन (सर्व शिक्षा अभियान), अम्बिकापुर को अविभाजित सरगुजा जिले के अंतर्गत सूरजपुर एवं बलरामपुर-रामानुजगंज क्षेत्र की पूर्व माध्यमिक शालाओं में फर्नीचर खरीदी के लिए करीब ₹2.70 करोड़ का आवंटन प्राप्त हुआ था।

जिला कार्यालय राजीव गांधी शिक्षा मिशन, सर्व शिक्षा अभियान, अम्बिकापुर द्वारा तत्कालीन कलेक्टर एवं जिला मिशन संचालक, अम्बिकापुर के अनुमोदन के बाद पंजीकृत फर्मों को CSIDC की निर्धारित दरों पर फर्नीचर क्रय एवं आपूर्ति के लिए क्रय आदेश जारी किए गए थे।

इसी प्रक्रिया में बाद में फर्नीचर की खरीदी और आपूर्ति से जुड़ी गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए और वर्ष 2017 में अपराध दर्ज कर जांच शुरू की गई।

बिना फर्नीचर पहुंचाए बिल लगाए, सरकारी भुगतान हासिल किया

जांच में संजय पटेल द्वारा संचालित मेसर्स दर्शन फेब्रिकेशन की भूमिका सामने आई। जांच के अनुसार फर्म द्वारा वास्तविक रूप से फर्नीचर की आपूर्ति नहीं की गई, इसके बावजूद फर्नीचर की आपूर्ति दर्शाते हुए बिल तैयार किए गए और उन्हें शासकीय भुगतान के लिए प्रस्तुत किया गया।

इन बिलों के आधार पर सरकारी राशि का भुगतान किया गया। जांच में पाया गया कि इस पूरी प्रक्रिया के कारण शासन को ₹67.15 लाख से अधिक की आर्थिक क्षति हुई।

जांच में यह भी आरोप सामने आया कि भुगतान की गई राशि में से संजय पटेल द्वारा अपना कमीशन रखने के बाद शेष राशि तत्कालीन जिला परियोजना समन्वयक सत्यप्रकाश पाण्डेय को दी गई। इस संबंध में जांच एजेंसी को साक्ष्य प्राप्त होने की बात कही गई है।

करीब दो महीने पहले ACB ने खंगाले थे दस्तावेज

इस मामले में गिरफ्तारी से पहले ACB की कार्रवाई ने जांच को महत्वपूर्ण दिशा दी थी। करीब दो महीने पहले जांच टीम ने संबंधित कार्यालय पहुंचकर फर्नीचर खरीदी से जुड़े हार्ड दस्तावेजों के साथ डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए थे।

इन दस्तावेजों और विवेचना के दौरान सामने आए तथ्यों का परीक्षण करने के बाद अब आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी की कार्रवाई की गई है।

6-7 अधिकारियों और करीब 12 फर्मों की भूमिका जांच के दायरे में

यह मामला केवल दो आरोपियों तक सीमित नहीं माना जा रहा है। जांच के दौरान विभाग के करीब 6 से 7 अधिकारियों की भूमिका सामने आने की बात कही गई है। इसके अलावा फर्नीचर की खरीदी और आपूर्ति प्रक्रिया में शामिल करीब 12 फर्मों की भूमिका भी जांच के दायरे में बताई जा रही है।

जांच में अन्य फर्नीचर आपूर्तिकर्ताओं द्वारा भी आपूर्ति में अनियमितता किए जाने और तत्कालीन जिला परियोजना समन्वयक सत्यप्रकाश पाण्डेय द्वारा उनसे कमीशन प्राप्त किए जाने के संबंध में तथ्य सामने आए हैं। अब जांच एजेंसी अन्य आपूर्तिकर्ताओं द्वारा वास्तव में कितना फर्नीचर सप्लाई किया गया, उनके नाम पर कितनी राशि का भुगतान हुआ और कथित कमीशन के रूप में कितनी रकम दी गई, इन सभी बिंदुओं की जांच कर रही है।

2017 में दर्ज हुआ था मामला, करीब 15 साल बाद गिरफ्तारी

इस पूरे मामले में वर्ष 2017 में अपराध दर्ज किया गया था। मामला वर्ष 2010-11 की खरीदी से जुड़ा होने के कारण यह लगभग 15 वर्ष पुराना प्रकरण है। लंबे समय से चल रही विवेचना में उपलब्ध दस्तावेजों, भुगतान संबंधी रिकॉर्ड, फर्मों की भूमिका और अन्य साक्ष्यों का परीक्षण किया गया। इसके बाद वर्तमान कार्रवाई की गई है।

जांच में आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1)(डी), 13(2) तथा सहपठित भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी, 420 और 409 के तहत अपराध से संबंधित पर्याप्त साक्ष्य पाए जाने की बात कही गई है।

आज दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया

19 अगस्त 2026 को तत्कालीन जिला परियोजना समन्वयक, राजीव गांधी शिक्षा मिशन, अम्बिकापुर सत्यप्रकाश पाण्डेय (एस.पी. पाण्डेय) और मेसर्स दर्शन फेब्रिकेशन एवं आकृति प्रिंटिंग प्रेस के संचालक संजय पटेल को गिरफ्तार किया गया। दोनों आरोपियों को माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।

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