दिल्ली नगर निगम (MCD) की स्थायी समिति ने सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग में कर्मचारियों की कमी दूर करने के लिए 1066 खाली पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं। शुक्रवार को हुई बैठक में समिति ने कहा कि कर्मचारियों की कमी के कारण मच्छरों से होने वाली बीमारियों की रोकथाम के प्रयास प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में खाली पदों को भरने के लिए जल्द कदम उठाने की जरूरत है। सत्या शर्मा की अध्यक्षता में हुई नगर निगम की शीर्ष वित्तीय समिति की बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इनमें राजधानी के 126 प्रवेश बिंदुओं पर बैरियर-फ्री टोल कलेक्शन सिस्टम लागू करने और अगले 10 वर्षों तक 70 मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनें तैनात करने की 923.57 करोड़ रुपये की परियोजना शामिल है।
स्वास्थ्य विभाग में कर्मचारियों की कमी होगी दूर
स्थायी समिति ने सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग में 1066 रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए। समिति का मानना है कि मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों जैसे डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया की रोकथाम के लिए पर्याप्त कर्मचारियों की उपलब्धता जरूरी है। कर्मचारियों की कमी के कारण मच्छरों के प्रजनन स्थलों की पहचान, नियमित निरीक्षण और रोकथाम से जुड़े अभियानों पर असर पड़ सकता है। इसलिए अधिकारियों को भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए कहा गया है।
126 प्रवेश बिंदुओं पर बैरियर-फ्री टोल वसूली
बैठक में दिल्ली के 126 प्रवेश बिंदुओं पर बिना बैरियर के टोल वसूली व्यवस्था लागू करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। नई व्यवस्था में कैमरों, RFID और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन तकनीक के जरिए वाहनों की पहचान कर शुल्क वसूला जाएगा। इससे व्यावसायिक वाहनों को टोल और पर्यावरण प्रतिपूर्ति शुल्क (ECC) जमा करने के लिए बैरियर पर रुकने की जरूरत नहीं होगी। MCD को उम्मीद है कि इससे प्रवेश मार्गों पर लगने वाले जाम को कम करने में मदद मिलेगी।
1066 पदों पर होगी भर्ती, जानिए किस पद के कितने कर्मचारी
नगर निगम के प्रस्ताव के अनुसार, सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग में खाली पड़े पदों को भरने के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इनमें अलग-अलग श्रेणियों के पद शामिल हैं।
14 एंटी-मलेरिया अधिकारी
105 मलेरिया इंस्पेक्टर
398 असिस्टेंट मलेरिया इंस्पेक्टर
549 मल्टी-टास्किंग स्टाफ (MTS)
इन नियुक्तियों का उद्देश्य मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों की रोकथाम के लिए फील्ड स्तर पर कर्मचारियों की उपलब्धता बढ़ाना है।
फील्ड कर्मचारियों की कमी से प्रभावित हो रहे रोकथाम अभियान
प्रस्ताव में बताया गया है कि फील्ड कर्मचारियों की कमी के कारण मच्छरों की निगरानी और उनके प्रजनन स्थलों की जांच जैसे महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हो सकते हैं। ये कर्मचारी एंटी-लार्वल अभियान चलाने, फॉगिंग करने और लोगों को मच्छरजनित बीमारियों के प्रति जागरूक करने की जिम्मेदारी निभाते हैं। डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों के हर साल सामने आने वाले खतरे को देखते हुए इन पदों को भरना जरूरी माना गया है। पर्याप्त कर्मचारियों के बिना नियमित निगरानी और रोकथाम अभियान चलाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। बैठक के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के पार्षदों ने अपने-अपने वार्ड की समस्याएं उठाईं। इनमें साफ-सफाई, सड़कों की मरम्मत, सफाई कर्मचारियों की कमी और पार्कों के रखरखाव से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहे। इस पर स्थायी समिति की अध्यक्ष सत्या शर्मा ने सभी जोनल डिप्टी कमिश्नरों को अपने कार्यालयों का औचक निरीक्षण करने और कर्मचारियों की उपस्थिति पर नजर रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पार्षदों को अपने वार्ड की समस्याओं के समाधान के लिए बार-बार निगम मुख्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ने चाहिए। अधिकारियों को जोन स्तर पर ही शिकायतों का समय पर समाधान करना होगा। उन्होंने प्रत्येक वार्ड में कम से कम एक पार्क में रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने के निर्देश भी दिए, ताकि बारिश के पानी का संचयन कर उसे जमीन में पहुंचाया जा सके।
126 प्रवेश बिंदुओं पर बैरियर-फ्री टोल वसूली को मंजूरी
स्थायी समिति ने दिल्ली के 126 प्रवेश बिंदुओं पर टोल कलेक्शन सिस्टम को मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) तकनीक से अपग्रेड करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी। नई व्यवस्था लागू होने के बाद व्यावसायिक वाहनों को रोड टैक्स और पर्यावरण प्रतिपूर्ति शुल्क (ECC) जमा करने के लिए बैरियर पर रुकने की जरूरत नहीं होगी। इस सिस्टम में रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इनके जरिए चलते वाहनों की पहचान कर अपने आप शुल्क वसूला जा सकेगा। इससे टोल पॉइंट पर वाहनों की कतारें कम होंगी और यातायात सुचारु बनाने में मदद मिलेगी।
923.57 करोड़ से लगेंगी 70 मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनें
दिल्ली में सड़क की धूल और वाहनों की आवाजाही से पैदा होने वाले पार्टिकुलेट मैटर को कम करने के लिए MCD ने 70 मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनें लगाने की 923.57 करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी दी है। ये मशीनें अगले 10 वर्षों तक निगम की सड़कों की सफाई करेंगी। इस परियोजना को तीन पैकेजों में बांटा गया है।
पहला पैकेज: लॉयन सर्विसेज लिमिटेड को 29 मशीनें लगाने के लिए 369.53 करोड़ रुपये का काम दिया जाएगा।
दूसरा पैकेज: जीए इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड और वीएन इंजीनियरिंग कंपनी के कंसोर्टियम को 28 मशीनों के लिए 368.83 करोड़ रुपये का काम मिलेगा।
तीसरा पैकेज: जेएस एनवायरो सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को 13 मशीनें लगाने के लिए 185.20 करोड़ रुपये का काम दिया जाएगा।
संबंधित कंपनियों को मशीनों की तैनाती के साथ अगले 10 वर्षों तक उनके संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी भी निभानी होगी।
मशीनें लगाने में देरी, 40 अतिरिक्त मशीनें किराये पर लेगा निगम
अधिकारियों के अनुसार, 70 नई मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनों की तैनाती में देरी हुई है। योजना थी कि सर्दियों में प्रदूषण का मौसम शुरू होने से पहले ये मशीनें उपलब्ध हो जाएंगी, जिससे दिल्ली में सड़क सफाई करने वाली मशीनों का बेड़ा लगभग दोगुना हो सकेगा। हालांकि, देरी को देखते हुए MCD ने आकस्मिक योजना तैयार की है। इसके तहत मौजूदा बेड़े की क्षमता बढ़ाने के लिए चार महीने के लिए 40 अतिरिक्त मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनें किराये पर लेने की प्रक्रिया शुरू की गई है। फिलहाल नगर निगम लगभग 1400 किलोमीटर लंबी और 60 फीट से अधिक चौड़ी मुख्य सड़कों पर 66 मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनों का संचालन कर रहा है।
सभी 250 वार्डों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की तैयारी
स्थायी समिति की अध्यक्ष सत्या शर्मा ने कहा कि नगर निगम जल्द ही दिल्ली के सभी 250 वार्डों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लागू करने का प्रस्ताव लाएगा। इसका उद्देश्य बारिश के पानी का संचयन कर भूजल स्तर को बेहतर बनाने में मदद करना है। बैठक में पार्षदों ने सफाई, सड़कों की मरम्मत, सफाई कर्मचारियों की कमी और पार्कों के रखरखाव से जुड़े मुद्दे भी उठाए। शर्मा ने जोनल डिप्टी कमिश्नरों को कार्यालयों का औचक निरीक्षण करने और कर्मचारियों की उपस्थिति पर नजर रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वार्ड स्तर की समस्याओं का समाधान जोन में ही होना चाहिए, ताकि पार्षदों को बार-बार निगम मुख्यालय न आना पड़े।
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