राजधानी दिल्ली में एंट्री पॉइंट पर लगने वाले जाम से जल्द राहत मिलने की उम्मीद है। दिल्ली नगर निगम (MCD) की स्थायी समिति ने राजधानी के 126 प्रवेश बिंदुओं पर बैरियर-फ्री टोल वसूली व्यवस्था लागू करने की योजना को मंजूरी दे दी है। नई व्यवस्था शुरू होने के बाद व्यावसायिक वाहनों को टोल टैक्स और पर्यावरण प्रतिपूर्ति शुल्क (ECC) जमा करने के लिए बैरियर पर रुकना नहीं पड़ेगा। इस नई व्यवस्था के तहत आधुनिक कैमरों और रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) तकनीक की मदद से दिल्ली में प्रवेश करने वाले वाहनों की पहचान की जाएगी। इसके बाद संबंधित वाहनों से टोल और ECC शुल्क की वसूली इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से की जाएगी। इससे टोल प्लाजा पर वाहनों की लंबी कतारें लगने की समस्या कम होने की उम्मीद है।

स्थायी समिति की अध्यक्ष सत्या शर्मा की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस योजना के लिए टेंडर जारी करने की भी मंजूरी दी गई। टोल वसूली के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति ने सालाना 910 करोड़ रुपये की न्यूनतम राशि तय करने की सिफारिश की है। यह राशि टेंडर के लिए शुरुआती आधार राशि होगी। इसे MCD की निश्चित या गारंटीड सालाना कमाई नहीं माना जाएगा। वास्तविक राजस्व टेंडर की शर्तों और वसूली व्यवस्था पर निर्भर करेगा।

छह साल के लिए दिया जाएगा ठेका

इस योजना के तहत छह साल का ठेका दिया जाएगा। शुरुआती छह महीने नई तकनीक लगाने और पूरी व्यवस्था तैयार करने में खर्च होंगे। इसके बाद अगले 54 महीने तक ठेकेदार सिस्टम का संचालन और रखरखाव करेगा। नई तकनीक में RFID और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट पहचानने वाली प्रणाली का इस्तेमाल होगा। इसके जरिए वाहनों की नंबर प्लेट स्कैन कर उनकी पहचान की जाएगी और निर्धारित शुल्क वसूला जाएगा।

शुल्क नहीं देने वालों को भेजा जाएगा डिजिटल नोटिस

नई व्यवस्था में बिना टोल या निर्धारित शुल्क चुकाए निकलने वाले वाहनों को डिजिटल नोटिस भेजने का भी प्रावधान किया गया है। वहीं, नई तकनीक लगाने और सिस्टम को पूरी तरह चालू करने की प्रक्रिया के दौरान मौजूदा RFID सिस्टम के माध्यम से टोल वसूली जारी रहेगी। इससे तकनीकी बदलाव के दौरान राजस्व वसूली प्रभावित नहीं होगी।

MCD के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के बैरियर-मुक्त व्यवस्था से संबंधित निर्देशों को ध्यान में रखते हुए टेंडर से जुड़े दस्तावेजों की समीक्षा की गई है। स्थायी समिति ने टेंडर के तीनों हिस्सों को मंजूरी दे दी है। अब टेंडर प्रक्रिया के जरिए इस व्यवस्था को लागू करने की दिशा में आगे कदम बढ़ाए जाएंगे। निगम की स्थायी समिति ने 70 मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनें लगाने की योजना को मंजूरी दे दी है। इस पूरी परियोजना पर 923.57 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। ये मशीनें अगले 10 साल तक दिल्ली की सड़कों की सफाई करेंगी।

तीन कंपनियों को मिलेगी जिम्मेदारी

परियोजना को तीन हिस्सों में बांटा गया है। पहले हिस्से में 29 मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनें लगाने के लिए लॉयन सर्विसेज लिमिटेड को 369.53 करोड़ रुपये का काम दिया जाएगा।

दूसरे हिस्से में 28 मशीनों की तैनाती के लिए जीए इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड और वीएन इंजीनियरिंग कंपनी के समूह को 368.83 करोड़ रुपये का काम सौंपने की मंजूरी दी गई है।

तीसरे हिस्से में 13 मशीनों के लिए जेएस एनवायरो सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को 185.20 करोड़ रुपये का काम दिया जाएगा। इस तरह कुल 70 मशीनों के जरिए दिल्ली की सड़कों की सफाई की जाएगी।

बिजली और CNG से चलेंगी मशीनें

नई योजना के तहत छोटी मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनें बिजली से संचालित होंगी, जबकि बड़ी मशीनों के लिए बिजली या सीएनजी का विकल्प रखा गया है। इन मशीनों के जरिए सड़कों की नियमित सफाई की जाएगी, जिससे धूल के कणों को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।

10 साल तक संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी

MCD की योजना के अनुसार, तीनों कंपनियों को मशीनें लगाने के साथ अगले 10 साल तक उनके संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी भी निभानी होगी। इससे मशीनों की उपलब्धता और सफाई व्यवस्था को लंबे समय तक बनाए रखने का लक्ष्य है। MCD की स्थायी समिति की बैठक में पार्षदों ने अपने-अपने वार्ड की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। पक्ष और विपक्ष के पार्षदों ने सफाई व्यवस्था, सड़कों की मरम्मत, सफाई कर्मचारियों की कमी, पार्कों की देखभाल और अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़े मुद्दे रखे। इन समस्याओं पर संज्ञान लेते हुए स्थायी समिति की अध्यक्ष सत्या शर्मा ने अधिकारियों को जोन स्तर पर ही शिकायतों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। सत्या शर्मा ने सभी जोन के उपायुक्तों को अपने कार्यालयों का औचक निरीक्षण करने और कर्मचारियों की उपस्थिति पर नियमित नजर रखने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्षदों को अपने वार्ड की समस्याओं के समाधान के लिए बार-बार निगम मुख्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ने चाहिए। अधिकारियों को स्थानीय स्तर पर ही शिकायतों का समाधान करना होगा, ताकि लोगों को भी समय पर राहत मिल सके।

हर वार्ड में विकसित होगा वाटर हार्वेस्टिंग वाला पार्क

बैठक में पर्यावरण संरक्षण और बारिश के पानी के बेहतर इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया। सत्या शर्मा ने अधिकारियों को प्रत्येक वार्ड में कम से कम एक ऐसा पार्क विकसित करने के निर्देश दिए, जहां वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग) की व्यवस्था हो। इसके माध्यम से बारिश के पानी को एकत्र करने और जमीन में पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी। इससे भूजल स्तर को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

सफाई और स्वास्थ्य सेवाएं होंगी प्राथमिकता

स्थायी समिति की अध्यक्ष ने अधिकारियों से कहा कि बैठक में पार्षदों की ओर से उठाए गए मुद्दों पर गंभीरता से काम किया जाए। उन्होंने बेहतर सफाई व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं और नागरिक सुविधाओं को निगम की प्राथमिकता बताया। साथ ही अधिकारियों को जवाबदेही के साथ काम करने और वार्डों में मूलभूत सुविधाओं की स्थिति सुधारने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निगम के अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों की शिकायतों को गंभीरता से लेना होगा और समस्याओं के समाधान में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m