संजय पाटीदार, भोपाल। राजधानी भोपाल को स्वच्छता में नंबर-1 बनाने के दावे एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं। एक तरफ भोपाल नगर निगम स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 को लेकर बड़े स्तर पर तैयारियों, मॉनिटरिंग और सफाई अभियान चलाने का दावा कर रही थी। वहीं दूसरी तरफ जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है।
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केंद्रीय स्वच्छता सर्वेक्षण टीम भोपाल पहुंच चुकी है और शहर के अलग-अलग इलाकों का निरीक्षण शुरू हो गया है, लेकिन इसके बावजूद कई वार्डों, चौराहों ,कॉलोनियों, बैकलेन और सड़कों पर अब भी गंदगी और कचरे के ढेर दिखाई दे रहे हैं। नगर निगम ने 85 वार्ड और 21 जोन में सफाई व्यवस्था की निगरानी के लिए कई अधिकारियों और कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई थी। निगम का दावा है कि सुबह से रात तक सफाई अभियान चलाया जा रहा है और लोगों से फीडबैक भी लिया जा रहा है। हालांकि शहर के कई हिस्सों में नालियों की सफाई अधूरी है, कचरा समय पर नहीं उठ रहा और सड़क किनारे गंदगी फैली हुई है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या सिर्फ सर्वेक्षण के समय दिखावे की सफाई से भोपाल दोबारा नंबर-1 का खिताब हासिल कर पाएगा।
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स्वच्छ सर्वेक्षण में शहरों को कुल 12,500 अंकों के आधार पर परखा जाता है। इसमें सफाई व्यवस्था, डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन, सार्वजनिक शौचालय, नागरिकों का फीडबैक और जमीनी निरीक्षण जैसे कई मानक शामिल होते हैं। कचरा मुक्त शहर और ODF जैसी रेटिंग के लिए भी अंक निर्धारित हैं। स्वच्छ सर्वेक्षण 2023-24 में राजधानियों में भोपाल स्वच्छता में पहले पायदान पर था। अब देखना होगा कि भोपाल इस बार भी स्वच्छता का ताज बचा पाता है या फिर दावों और हकीकत के बीच उसकी रैंकिंग खिसक जाती है।

