केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुजरात के अहमदाबाद में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान अपने राजनीतिक अनुभवों से जुड़े कई किस्से साझा किए। उन्होंने कहा कि जब भी उन्हें राज्य या केंद्र में मंत्री बनने का मौका मिला, उन्हें गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी ही मिली। इसी संदर्भ में उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा, “मेरे भाग्य में आंदोलनों से निपटना ही लिखा है।”
‘आंदोलन और आतंकियों से भी निपटना है’
अमित शाह ने कहा कि गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालने वाले व्यक्ति को आंदोलनों के साथ-साथ आतंकवाद जैसी गंभीर चुनौतियों से भी निपटना पड़ता है। उन्होंने अहमदाबाद का उदाहरण देते हुए बताया कि किसी बड़े शहर में कर्फ्यू लागू करना भी आसान काम नहीं होता। इसके लिए सैकड़ों पुलिस वाहनों पर माइक लगाकर लोगों को घरों में रहने की घोषणा करानी पड़ती है।
कोरोना के शुरुआती दौर को किया याद
गृह मंत्री ने कोरोना महामारी के शुरुआती दिनों को याद करते हुए कहा कि जब देश में कोरोना से पहली मौतें हुईं और पुणे की लैब से संक्रमण की पुष्टि हुई, तब उन्हें स्थिति तेजी से बिगड़ने की चिंता हुई। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात का जिक्र करते हुए बताया कि प्रधानमंत्री ने चिंता करने के बजाय समाधान तलाशने पर जोर दिया।
शाह के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए ‘जनता कर्फ्यू’ का विचार रखा। शाह ने शुरुआत में आशंका जताई थी कि यह प्रयोग सफल नहीं होगा, क्योंकि सरकारी घोषणाओं के बावजूद लोग अक्सर बाहर निकलते हैं। हालांकि, जनता ने जिस तरह इसका पालन किया, उससे वह खुद भी हैरान रह गए।
‘अगर जनता लड़ने को तैयार है तो हमें कोई नहीं रोक सकता’
अमित शाह ने कहा कि जनता के इस अनुशासन से प्रधानमंत्री मोदी को भरोसा हुआ कि देश कोरोना के खिलाफ लड़ाई जीत सकता है। उन्होंने कहा, “अगर जनता लड़ने को तैयार है तो हमें कोई नहीं रोक सकता।”
वैक्सीन निर्माण में भारत की भूमिका का जिक्र
शाह ने कोरोना वैक्सीन का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत उन शुरुआती देशों में शामिल था, जिन्होंने कोरोना के खिलाफ वैक्सीन विकसित की। उन्होंने दावा किया कि भारत ने न केवल अपने नागरिकों को वैक्सीन उपलब्ध कराई, बल्कि करीब 70 देशों तक वैक्सीन पहुंचाकर वैश्विक स्तर पर भी मदद की।
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