टोहाना। राजस्थान के कोटा से पिछले कई दिनों से लापता मंदबुद्धि महिला पिंकी और उसके पांच साल के बेटे नीरज का आखिरकार अपने परिवार से मिलन हो गया। दोनों भटकते-भटकते हरियाणा के टोहाना शहर में स्थित एक आश्रम में पहुंच गए थे। भारत विकास परिषद की टीम और बयाना के रहने वाले पंडित दीपक शर्मा की सूझबूझ की वजह से यह बिखरा हुआ परिवार एक बार फिर से एक साथ आ गया है।

बच्चे ने बताया सरनेम तो मिली बड़ी कामयाबी

भारत विकास परिषद (Bharat Vikas Parishad) के सदस्य कुश भार्गव ने बताया कि करीब पांच दिन पहले स्थानीय पुलिस ने इस महिला और बच्चे को आश्रम की संचालिका रितु को सौंपा था। महिला मानसिक रूप से थोड़ी कमजोर होने के कारण अपना घर का पता सही तरीके से नहीं बता पा रही थी। वह कभी खुद को जाखल की, तो कभी करौली और बयाना की बताती थी। इसी बीच चार साल के मासूम बच्चे नीरज ने अपना पूरा नाम नीरज कोहली शकवाल बता दिया। बस यही नाम इस पूरे मामले को सुलझाने की सबसे बड़ी कड़ी बन गया।

फेसबुक पोस्ट और सोशल मीडिया से खुला रास्ता

कुश भार्गव ने बताया कि कोहली शकवाल सरनेम (surname connection) आमतौर पर राजस्थान के करौली और बयाना क्षेत्र में पाया जाता है। इसके बाद टीम ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट डाली जिसमें लिखा था कि क्या कोई बयाना से है। इस पोस्ट को देखकर वर्धमान मित्तल नामक शख्स ने टोहाना के एक मंदिर में सेवादार पंडित दीपक शर्मा से संपर्क कराया। पंडित दीपक मूल रूप से राजस्थान के बयाना के ही रहने वाले हैं।

बयाना की लोकल बोली ने दूर किया सारा कन्फ्यूजन

पंडित दीपक शर्मा तुरंत आश्रम पहुंचे और उन्होंने महिला से बयाना की लोकल भाषा (local dialect) में बातचीत शुरू की। बातों-बातों में जब उन्होंने बयाना के गांधी चौक और कुंड का जिक्र किया, तो महिला ने तुरंत पहचान लिया। इसके बाद उन्होंने राजस्थान में अपने जानकारों की मदद से कोटा में रहने वाले महिला के भाई सचिन को ढूंढ निकाला।

सचिन ने बताया कि उनकी बहन 29 मई से लापता थी और वे लोग कोटा के थानों के चक्कर काट रहे थे। सूचना मिलते ही भाई तुरंत हरियाणा के टोहाना (Tohana Haryana) पहुंचा और अपनी बहन व भांजे को गले लगा लिया। बयाना से टोहाना की दूरी करीब 456 किलोमीटर है, लेकिन इंटरनेट और एक छोटे बच्चे की समझदारी ने इस नामुमकिन काम को मुमकिन बना दिया।