सोहराब आलम/​पीपराकोठी (पूर्वी चंपारण): बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाएं धरातल पर कैसे दम तोड़ती हैं, इसकी बानगी पूर्वी चंपारण के पीपराकोठी प्रखंड में देखने को मिल रही है। शिक्षा और पोषण का केंद्र बनने के लिए बनाया गया एक भवन पिछले 10 वर्षों से ताले में बंद है। आज इस भवन का उपयोग बच्चों के विकास के बजाय मवेशियों का भूसा रखने के लिए किया जा रहा है।

​सरकारी धन का दुरुपयोग

​वर्ष 2014 में सरकार ने बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा और कुपोषण से दूर रखने के उद्देश्य से वार्ड संख्या-12, चक्रधे गांव (दक्षिणी ढेकहां पंचायत) में आंगनबाड़ी केंद्र संख्या-53 का निर्माण कराया था। इस भवन के लिए सरकार ने 5 लाख 75 हजार 500 रुपये की बड़ी राशि खर्च की थी। स्थानीय लोगों की मानें तो भवन निर्माण पूरा होने के बाद से यह केंद्र कभी भी पूर्ण रूप से संचालित नहीं हो सका। जबकि, इस केंद्र के लिए सेविका और सहायिका की नियुक्ति भी कागजों पर की जा चुकी थी।

​ग्रामीण परेशान, योजना से वंचित बच्चे

​केंद्र के बंद रहने के कारण इस क्षेत्र के दर्जनों बच्चे सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं और प्रारंभिक शिक्षा से पूरी तरह वंचित हैं। ग्रामीण राजबल्लभ प्रसाद, मनोज राम, राहुल कुमार यादव, अवधेश यादव, अरुण कुमार राम, किशोर राम और संजय राय सहित दर्जनों ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने कई बार स्थानीय अधिकारियों से लेकर जिला स्तर तक लिखित और मौखिक शिकायतें कीं, लेकिन हर बार उन्हें कोरे आश्वासन ही मिले। ग्रामीणों का आक्रोश इस बात को लेकर है कि जिस भवन को बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए बनाया गया था, वह आज मवेशियों का चारा (भूसा) रखने का गोदाम बनकर रह गया है।

​विभाग की चुप्पी और कार्रवाई का निर्देश

​मामले की गंभीरता को देखते हुए जब बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (सीडीपीओ) स्वेता से संपर्क किया गया, तो उन्होंने कहा कि यह मामला उनके संज्ञान में है। उन्होंने सख्ती दिखाते हुए संबंधित सेविका को निर्देश दिया है कि 15 दिनों के भीतर केंद्र संख्या-53 का संचालन सुचारू रूप से शुरू किया जाए। सीडीपीओ ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय सीमा में केंद्र चालू नहीं हुआ, तो संबंधित सेविका पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
​अब देखना यह है कि प्रशासन का यह निर्देश केवल कागजों की शोभा बढ़ाता है या धरातल पर बच्चों की किलकारियां गूंजती हैं। फिलहाल ग्रामीणों को उम्मीद है कि दशकों से चली आ रही यह बदहाली अब खत्म होगी।