उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड (Ankita Bhandari murder case) में पुलिस के चंगुल से दूर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए अंकिता भंडारी न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच ने फिर से सड़कों पर उतरना शुरू कर दिया है. इसी कड़ी में रविवार को दिल्ली में विभिन्न राजनीतिक दलों और संगठनों के प्रतिनिधियों ने दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया.

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि अंकिता भंडारी हत्याकांड को 3 साल से ज्यादा का समय हो गया है. लेकिन अभी तक उसे संपूर्ण न्याय नहीं मिल पाया है. इस मामले में कथित वीआईपी की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए. अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर भाजपा के पूर्व विधायक की पत्नी ने कथित वीआईपी का सोशल मीडिया में खुले तौर पर नाम लिया है. लेकिन मुख्यमंत्री ने अभी तक उन पर कोई कार्रवाई नहीं की.

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बता दें कि प्रदेश के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड मामले में सीबीआई जांच और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए जनवरी महीने में कांग्रेस और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने भी प्रदेशव्यापी बंद का आह्वान किया था. इस हत्याकांड को लेकर कांग्रेस धामी सरकार पर लगतार हमलावर बनी हुई है. प्रदेशभर में जोरदार प्रदर्शनों का भी दौर चला. कांग्रेस लगातार इस प्रकरण की जांच सुप्रीम कोर्ट के जजों की कमेटी से कराने की मांग कर चुकी है. इधर सीबीआई से जांच कराने की अनुशंसा की जा चुकी है.

बीते 10 जनवरी को अंकिता भंडारी के परिजनों ने सीएम धामी से मुलाकात की थी. सीएम धामी ने कहा था कि बेटी अंकिता भंडारी को न्याय दिलाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है. अंकिता के माता-पिता ने भेंट के दौरान CBI जांच की मांग रखी थी जिसका सम्मान करते हुए सरकार ने इस मामले की जांच CBI से कराने का निर्णय लिया. सीएम ने कहा था कि मातृशक्ति की सुरक्षा एवं उनके सम्मान के लिए हमारी सरकार सदैव प्रतिबद्ध रही है. देवभूमि उत्तराखंड में कानून का राज है, यहां दोषियों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा.

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गौरतलब है कि 19 वर्षीय अंकिता 18 सितंबर 2022 को अचानक गायब हो गई थी. वह ऋषिकेश के निकट वंतारा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थी. पांच दिन बाद 24 सितंबर को ऋषिकेश के नजदीक चिल्ला नहर से अंकिता का शव बरामद किया गया था. मामले में पुलिस ने रिजॉर्ट के मालिक और उसके 2 साथियों को गिरफ्तार किया था.