Business Desk – Apollo Tyres Share Price : Apollo Tyres के शेयरों में 24 अगस्त को करीब 5% की तेजी देखने को मिली। शेयर में यह उछाल ब्रोकरेज फर्म UBS की रेटिंग अपग्रेड के बाद आया। UBS ने Apollo Tyres को ‘Neutral’ से बढ़ाकर ‘Buy’ कर दिया है और शेयर का टारगेट प्राइस 590 रुपए तय किया है। शुक्रवार के 439.95 रुपए के क्लोजिंग प्राइस से तुलना करें तो यह करीब 34% की संभावित तेजी का संकेत देता है।

UBS ने क्यों बदली रेटिंग?
UBS का मानना है कि Apollo Tyres का वैल्यूएशन अभी भी उसके प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले कम है। पिछले चार साल में कंपनी के शेयर का प्रदर्शन पूरे टायर सेक्टर की तुलना में कमजोर रहा है। हालांकि, ब्रोकरेज के मुताबिक अब कंपनी की स्थिति धीरे-धीरे बेहतर हो रही है।
मैनेजमेंट भारत में कारोबार को मजबूत करने के लिए कई रणनीतिक कदम उठा रहा है। इनमें ब्रांड बिल्डिंग पर निवेश भी शामिल है। कंपनी की ओर से भारतीय क्रिकेट टीम की जर्सी को स्पॉन्सर करना इसी रणनीति का हिस्सा है।
यूरोप बिजनेस में भी सुधार की उम्मीद
UBS को Apollo Tyres के यूरोप बिजनेस में सुधार की उम्मीद है। ब्रोकरेज का मानना है कि कंपनी की रणनीतिक पहल धीरे-धीरे असर दिखा सकती हैं और इससे मध्यम अवधि में कमाई को सपोर्ट मिल सकता है।
UBS के मुताबिक, निवेशक फिलहाल कमोडिटी लागत के दबाव और हाल की चुनौतियों पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। इसके चलते वे कंपनी की कमाई में संभावित बड़े सुधार को नजरअंदाज कर रहे हैं।
Q2FY27 में दबाव, बाद में कमाई सुधरने का अनुमान
ब्रोकरेज के अनुसार Q2FY27 में Apollo Tyres पर दबाव बना रह सकता है। इसकी एक बड़ी वजह नेचुरल रबर की कीमतें हैं। Q1FY27 में नेचुरल रबर की कीमतें तिमाही आधार पर 22% बढ़ी थीं।
हालांकि, UBS को इसके बाद कंपनी की कमाई में काफी सुधार की उम्मीद है। ब्रोकरेज का अनुमान है कि FY28E में EBITDA सालाना आधार पर 21% बढ़ सकता है, क्योंकि कमोडिटी लागत का दबाव कम होने और कारोबार की स्थिति बेहतर होने की उम्मीद है।
मांग मजबूत, रणनीतिक कदमों का फायदा मिलने की उम्मीद
UBS का कहना है कि Apollo Tyres की मांग मजबूत बनी हुई है और कंपनी की रणनीतिक पहल भी आगे बढ़ रही हैं। ऐसे में ब्रोकरेज को लगता है कि बाजार कंपनी की मध्यम अवधि में कमाई सुधारने की क्षमता को कम आंक रहा है।
हालांकि, UBS का 590 रुपए का टारगेट एक ब्रोकरेज अनुमान है। शेयर में वास्तविक प्रदर्शन बाजार की स्थिति, कमोडिटी कीमतों, कंपनी की कमाई और कारोबारी प्रदर्शन समेत कई कारकों पर निर्भर करेगा।

