Dharm Desk – शनिदेव को न्याय और कर्म का देवता माना गया है। शनि की चाल धीमी होने के कारण उनका राशि परिवर्तन लंबे समय तक प्रभाव डालता है। शनि जब किसी राशि में गोचर करते हैं तो करीब ढाई साल तक वहां रहते है। इसी वजह से शनि की साढ़ेसाती भी लगभग साढ़े सात साल तक चलती है। इसे पूरे समय काल को तीन चरणों में बांटा जाता है। फिलहाल शनिदेव मीन राशि में गोचर कर रहे है। वैदिक ज्योतिष की गणना के अनुसार, शनि ने 29 मार्च 2025 को मीन में प्रवेश किया था और 2026 में भी इसी राशि में रहेंगे। इसके कारण कुंभ, मीन और मेष राशि के जातक साढ़ेसाती के अलग-अलग चरणों से गुजर रहे हैं। यहां बात दें कि शनि जिस भी राशि में गोचर करते हैं, उसके एक आगे और एक पीछे की राशि प्रभावित होती है।

कुंभ राशि वालों के लिए राहत की शुरुआत
कुंभ के जातक इस समय साढ़ेसाती के अंतिम चरण से गुजर रहे हैं। ऐसे में आने वाला समय उनके लिए महत्वपूर्ण रहने वाला है। 3 जून 2027 को शनि पहली बार मीन राशि से निकलकर मेष में प्रवेश करेंगे। इस दौरान कुंभ राशि की साढ़ेसाती समाप्त होने की स्थिति बनेगी। हालांकि यहां एक बात ध्यान रखना जरूरी है । शनि 20 अक्टूबर 2027 को वक्री होकर दोबारा मीन राशि में लौट आएंगे। इसलिए 3 जून 2027 को मिलने वाली राहत को स्थायी मुक्ति नहीं माना जाना चाहिए। शनि 23 फरवरी 2028 को दोबारा मेष राशि में प्रवेश करेंगे। इसके बाद मीन राशि से उनका अंतिम प्रस्थान माना जाएगा।
मेष राशि वालों की शुरू हो चुकी है साढ़ेसाती
मेष राशि के जातकों के लिए साढ़ेसाती की शुरुआत 29 मार्च 2025 को शनि के मीन राशि में प्रवेश के साथ ही हो गई है। अभी इनका पहला चरण चल रहा है। 3 जून 2027 को शनि के मेष राशि में पहुंचने के बाद साढ़ेसाती का मध्य चरण शुरू होगा। मेष वालों को इससे पूरी तरह राहत के लिए अभी काफी समय इंतजार करना होगा। इस दौरान शनि पीड़ा से राहत के लिए शनिदेव की उपासना जरूरी है। ज्योतिषीय गणना में इनकी साढ़ेसाती का पूरा चक्र 2032 तक चलने वाला माना जाता है।
मीन राशि वालों पर चल रहा है मध्य चरण
मीन राशि के जातकों पर इस सयम साढ़ेसाती का मध्य चरण चल रहा है। शनि के मीन में होने के कारण यह चरण विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। 3 जून 2027 को शनि के मेष में जाने पर मीन राशि वालों के लिए साढ़ेसाती का अंतिम चरण शुरू होगा। इसके बाद शनि 20 अक्टूबर 2027 को फिर एक बार मीन राशि में लौटेंगे। 23 फरवरी 2028 को दोबारा मेष में प्रवेश कर लेंगे। इसलिए मीन राशि वालों के लिए भी आने वाले वर्षों में साढ़ेसाती का प्रभाव बना रहेगा।
साढ़ेसाती को केवल परेशानी का समय न मानें
साढ़ेसाती का नाम सुनते ही कई लोग परेशान हो जाते हैं, लेकिन ज्योतिष में इसे केबल नुकसान या परेशानी से जोड़कर नहीं देखा जाता है। यह समय उस जातक के मेहनत, अनुशासन और जिम्मेदारी का महत्व समझाने वाला भी होता है। शनिदेव कर्म प्रधान हैं। इसलिए इस अवधि में व्यक्ति को अपने काम और जिम्मेदारियों पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी जाती है । कुंभ वालों के लिए 2027 से राहत का संकेत जरूर बन रहा है, लेकिन शनि की वक्री चाल के कारण इस बदलाव को समझना भी जरूरी है । वहीं मेष और मीन राशि वालों को अभी साढ़ेसाती के प्रभाव से पूरी तरह राहत मिलने में समय लगेगा। ऐसे में हर शनिवार शनिदेव का सारसों का तेल चढ़ाने, हनुमानजी की अराधना करने से विशेष राहत मिलेगी।


