Dharm Desk- अगर आपके जीवन में लगातार आर्थिक तंगी बनी रहती है. विवाह में रुकावटें आती हैं. संतान सुख में परेशानी हो रही है. घर में बिना वजह कलह रहती है. बार-बार बीमारियां घेर लेती हैं. बार-बार सपनों में पूर्वज दिखाई देते हैं, तो ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह पितृदोष के संकेत के रूप में दिखा जाता है. ज्योतिष में कालसर्प दोष के बाद पितृ दोष को सबसे प्रभावशाली और कष्टदायक दोष माना जाता है. मान्यता है कि जब पूर्वजों की आत्माएं असंतुष्ट रहती हैं या उनका उचित सम्मान और श्राद्धकर्म नहीं किया जाता है. तब वे अपने वंशजों को विभिन्न प्रकार की परेशानियों का सामना कराती हैं. इसी स्थिति को पितृ दोष कहा जाता है.

कुंडली में बनाता पितृदोष
कुंडली में कुछ विशेष ग्रह स्थितियां पितृ दोष का निर्माण करती हैं. जब लग्न या पंचम भाव में सूर्य, मंगल और शनि का प्रभाव होता है, अथवा अष्टम भाव में गुरु और राहु एक साथ बैठते हैं. तब यह दोष बनता है. इसके अलावा राहु का केंद्र या त्रिकोण में होना तथा सूर्य-चंद्रमा और लग्नेश का राहु से संबंध भी पितृ दोष का कारण माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अपने माता-पिता, बुजुर्गों या पूर्वजों का अपमान करना. उनकी सेवा न करना. उन्हें कष्ट पहुंचाना भी इस दोष को जन्म देता है.
इस तरह पहचाने पितृदोष
पितृ दोष से पीड़ित व्यक्ति को जीवन में लगातार संघर्ष करना पड़ता है. ऐसे लोगों के विवाह में देरी होती है, रिश्ते बनकर टूट जाते हैं और वैवाहिक जीवन तनावपूर्ण बना रहता है. महिलाओं को गर्भधारण में कठिनाई आ सकती है. संतान सुख में बाधा आती हैं. इसके अलावा नौकरी और व्यापार में रुकावट, कर्ज बढ़ना, परिवार में दुर्घटनाएं, अचानक मृत्यु, मानसिक तनाव और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी इसके लक्षण माने जाते है. कई बार घर में भूमि-विवाद, आपसी मनमुटाव और नकारात्मक वातावरण भी बना रहता है.
पितृ दोष से मुक्ति के उपाय
ज्योतिष में पितृ दोष से मुक्ति के कई उपाय बताए गए है. अमावस्या के दिन गजेंद्र मोक्ष का पाठ करना, पीपल के वृक्ष पर दूध चढ़ाना और भगवान विष्णु की पूजा करना शुभ माना है. शनिवार को काले कुत्ते को उड़द के आटे के वड़े खिलाने तथा पितृ अमावस्या पर श्राद्ध और पितृ शांति कराने से भी राहत मिल सकती है. मान्यता है कि पूर्वजों का सम्मान, सेवा और नियमित तर्पण करने से पितृ दोष का प्रभाव धीरे-धीरे कम होने लगता है.
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