रायपुर। दुर्गा सप्तशती के 11 वें अध्याय नारायणी स्तुति के छठे श्लोक- विद्याः समस्तास्तव देवि भेदाः स्त्रियः समस्ताः सकला जगत्सु। त्वयैकया पूरितमम्बयैतत् का ते स्तुतिः स्तव्यपरा परोक्तिः॥ इस श्लोक के भावार्थ में नारी शक्ति के लिए यथोचित सम्मान निहित है। इस श्लोक के अनुसार संसार में जितनी भी विद्या और ज्ञान के रूप हैं वो सब मां दुर्गा के ही विभिन्न स्वरूप हैं और इस जगत की सभी स्त्रियाँ उनके ही विविध रूपों का प्रतिनिधित्व करती हैं।
ज्ञान, शक्ति और सृजन की सजीव अभिव्यक्ति नारी को महज़ एक व्यक्ति के तौर देखा जाना उचित नहीं है। भारतीय संस्कृति की आत्मा ही यही है, जिसमें नारी को केवल सम्मान ही नहीं बल्कि सृजन और शक्ति का स्रोत भी माना गया है, लेकिन एक कटु सत्य यह भी है कि सदियों से देवी के रूप में पूजित स्त्री को समाज और राजनीति में समान भागीदारी देने में काफ़ी देर हुई, मगर वर्तमान में इस ऐतिहासिक असंतुलन को दूर करने की दिशा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 एक क्रांतिकारी और ऐतिहासिक कदम बनकर सामने आया है।

नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पारित 106वां संवैधानिक संशोधन भारतीय लोकतंत्र को और भी अधिक समावेशी और प्रतिनिधिपूर्ण बनाने वाला कदम है। इस अधिनियम से लोकसभा, राज्य विधानसभा और दिल्ली विधानसभा में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण सुनिश्चित होगा। करेंगा है, जो उन्हें केवल मतदाता नहीं, बल्कि नीति-निर्माता बनने का अधिकार देता है।
नारी श्रद्धा से सहभागिता तक
भारतीय परंपरा में नारी को “शक्ति” कहा गया है, लेकिन आधुनिक लोकतंत्र में उसे समान अवसर देना उतना ही आवश्यक है। यह अधिनियम उसी सोच को साकार करता है, जहाँ नारी केवल पूजनीय नहीं, बल्कि सक्रिय भागीदारी करने वाली नागरिक बनती है। अब महिलाएं संसद और विधानसभाओं में अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों को सामने ला सकेंगी जो उनके जीवन से सम्बन्ध रखते हैं। उनके इस तेवर से शासन अधिक संवेदनशील और प्रभावी बनेगा।
दशकों का इंतजार हुआ खत्म
महिला आरक्षण का मुद्दा भारत में वर्षों पुराना था। भारत में कई सरकारें आईं लेकिन कोई इसे अमली जामा न पहना सका। 2023 में इस कानून का बनना यह दर्शाता है कि अब देश सही दिशा में निर्णायक कदम उठाने में सक्षम है। राष्ट्र की यह विधायी सफलता उन करोड़ों महिलाओं की जीत है जो अपनी पहचान और अधिकार के लिए वर्षों से संघर्ष कर रही थीं।
समावेशी है अधिनियम
अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) की महिलाओं के लिए भी आरक्षण का प्रावधान इस अधिनियम को और अधिक समावेशी बनाता है। इस अधिनियम से समाज के हर वर्ग की महिलाओं को नेतृत्व का अवसर मिलेगा और उनको मिलने वाले सामाजिक न्याय को मजबूती मिलेगी। यह कदम भारत को आर्थिक और सामाजिक रूप से भी सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।
महिलाएं ही तय करेंगी भविष्य की नई दिशा
परिसीमन प्रक्रिया के बाद भारतीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी में असाधारण वृद्धि देखने को मिलेगी। 2029 तक इस अधिनियम के पूरी तरह लागू होने की संभावना जताई जा रही है। ऐसा माना जा रहा है कि जैसे ही मंचों पर महिलाओं की संख्या बढ़ेगी, नीतियों में संवेदनशीलता और संतुलन स्वतः आएगा।
महिला सशक्तिकरण से ही राष्ट्र निर्माण संभव
नारी शक्ति वंदन अधिनियम एक ऐसा कदम है जो महिलाओं को उनके अधिकार के अलावा आत्मविश्वास और नेतृत्व का मंच भी प्रदान करने वाला है। “विकसित भारत” के निर्माण में महिलाओं की भूमिका को सुनिश्चित करने वाले इस अधिनियम के मूल में है जब नारी आगे बढ़ेगी तभी समाज और राष्ट्र भी आगे बढ़ेगा। हर नारी में देवी का अंश है इस बात को याद दिलाने वला मंत्र “विद्या समस्तास्तव देवी भेदाः इस अधिनियम के साथ अधिक सार्थक दिखाई देगा। इस भावना को पूजा तक सीमित न रखते हुए उसे व्यवहार और व्यवस्था में भी उतारने की तैयारी की जा रही है। भारत के लोकतंत्र को नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाला नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 एक शानदार ऐतिहासिक पहल है। इस अधिनियम ने इस तरफ़ इशारा किया है कि नारी केवल श्रद्धा की प्रतीक होने के साथ ही साथ शक्ति और नेतृत्व की पहचान भी बन गई है।

– संदीप अखिल, सलाहकार संपादक न्यूज़ 24 /लल्लूराम डॉट कॉम

