चंडीगढ़। हरियाणा कैडर के चर्चित पूर्व आईएएस अधिकारी अशोक खेमका को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से बड़ी कानूनी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) के उन आदेशों को निरस्त कर दिया है, जिनके तहत उन्हें भारत सरकार में अतिरिक्त सचिव और सचिव स्तर पर एंपैनलमेंट का लाभ देने से इनकार किया गया था।
खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि जब समान परिस्थितियों वाले कई अन्य आईएएस अधिकारियों को नियमों में छूट देकर अतिरिक्त सचिव और सचिव स्तर पर एंपैनल किया गया है, तो अशोक खेमका को इस लाभ से वंचित रखना संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत समानता के अधिकार का उल्लंघन है।
2019 में नहीं मिला था एंपैनलमेंट का लाभ
1991 बैच के आईएएस अधिकारी रहे अशोक खेमका को वर्ष 2010 में संयुक्त सचिव स्तर पर एंपैनल किया गया था। वर्ष 2019 में उनके बैच के कई अधिकारियों को अतिरिक्त सचिव और सचिव स्तर पर एंपैनलमेंट का लाभ मिला, लेकिन केंद्र सरकार ने यह कहते हुए उनका दावा खारिज कर दिया कि उन्होंने केंद्र सरकार में आवश्यक तीन वर्ष की प्रतिनियुक्ति पूरी नहीं की है।
इसके खिलाफ खेमका ने CAT और बाद में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने अदालत के समक्ष ऐसे 20 आईएएस अधिकारियों के उदाहरण रखे, जिन्हें केंद्रीय प्रतिनियुक्ति का अनुभव न होने के बावजूद नियमों में छूट देकर एंपैनल किया गया था।
हाईकोर्ट ने माना भेदभावपूर्ण फैसला
जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस दीपक मनचंदा की खंडपीठ ने पाया कि केंद्र सरकार खेमका द्वारा पेश किए गए तथ्यों का प्रभावी जवाब नहीं दे सकी। अदालत ने कहा कि जब नियमों में छूट देने का अधिकार मौजूद है और उसका लाभ अन्य अधिकारियों को दिया गया है, तो अशोक खेमका को इससे वंचित रखना भेदभावपूर्ण है।
अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि खेमका का दावा खारिज होने के बाद भी अन्य अधिकारियों को इसी प्रकार की छूट देकर अतिरिक्त सचिव स्तर पर एंपैनल किया गया।
सेवानिवृत्ति के बावजूद मिलेगा समान दर्जा
हालांकि अदालत ने माना कि अशोक खेमका अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं, इसलिए उन्हें केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति का वास्तविक लाभ नहीं दिया जा सकता। लेकिन हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि भविष्य में किसी आयोग, प्राधिकरण, ट्रिब्यूनल या अन्य संवैधानिक/वैधानिक पद पर नियुक्ति के लिए यदि अतिरिक्त सचिव या सचिव स्तर का एंपैनलमेंट आवश्यक या वांछनीय हो, तो अशोक खेमका को भी उसी स्तर का अधिकारी माना जाएगा।
इस फैसले के साथ हाईकोर्ट ने खेमका को भविष्य की नियुक्तियों और अवसरों में एंपैनल अतिरिक्त सचिव/सचिव के समान अधिकार और दर्जा प्रदान करने का निर्देश दिया है।

