पंचकूला। पंचकूला नगर निगम में करोड़ों रुपये के कथित वित्तीय घोटाले की जांच के बीच हरियाणा कैडर के 2012 बैच के IAS अधिकारी राम कुमार सिंह एक बार फिर सुर्खियों में हैं। CBI की गिरफ्त में आए राम कुमार सिंह की संपत्तियों और पारिवारिक कारोबार को लेकर कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। जांच एजेंसियां अब उनकी आर्थिक गतिविधियों और वित्तीय लेन-देन की गहन पड़ताल में जुटी हैं।

बताया जा रहा है कि राम कुमार सिंह की पत्नी व्यवसाय से जुड़ी हैं और पेट्रोल पंप, माइक्रो ब्रेवरी, रेस्टोरेंट, रेंटल प्रोजेक्ट, कृषि भूमि तथा प्रॉपर्टी कारोबार का संचालन करती हैं। वर्ष 2025 में दाखिल संपत्ति विवरण के अनुसार परिवार के नाम करोड़ों रुपये की चल-अचल संपत्तियां दर्ज हैं, जिनमें अधिकांश संपत्तियां हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) के नाम पर हैं।

दस्तावेजों के अनुसार घोषित संपत्तियों का अनुमानित मूल्य करीब 3.2 करोड़ रुपये है, जबकि एचयूएफ के नाम दर्ज संपत्तियों की कीमत लगभग 2.43 करोड़ रुपये बताई गई है। इसके अलावा कुरुक्षेत्र के पिपली क्षेत्र में स्थित एक रिहायशी-कम-दुकान संपत्ति उन्हें पारिवारिक उपहार के रूप में मिली थी। इन संपत्तियों से प्रतिवर्ष करीब 19 लाख रुपये की आय होने का उल्लेख किया गया है।

CBI रिमांड में खुल सकते हैं कई राज

वहीं, करोड़ों रुपये के वित्तीय अनियमितता मामले में गिरफ्तार राम कुमार सिंह और सह-आरोपी प्रिंस शर्मा को विशेष CBI अदालत में पेश किया गया, जहां से दोनों को तीन दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया। जांच एजेंसी का दावा है कि सरकारी धन के ट्रांसफर, बैंकिंग प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन के कई अहम पहलुओं की जांच की जा रही है।

बैंक खातों और डिजिटल रिकॉर्ड की भी जांच

CBI के मुताबिक जांच के दौरान बैंक खातों, दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। एजेंसी को आशंका है कि मामले में वित्तीय अनियमितताओं का बड़ा नेटवर्क सक्रिय था। वहीं, कुछ डिजिटल रिकॉर्ड और बातचीत के साक्ष्य भी हटाए जाने की बात सामने आई है, जिसकी फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है।फिलहाल CBI रिमांड के दौरान पूछताछ जारी है और एजेंसी को मामले में कई और अहम खुलासों की उम्मीद है।