हेमंत शर्मा, इंदौर। धर्म, आस्था और दान के नाम पर इंदौर में ऐसा नजारा देखने को मिला जिसने हर किसी को चौंका दिया। मुनिश्री सुधासागर महाराज के चातुर्मास के दौरान कलश स्थापना के लिए हुई बोलियों ने करोड़ों के सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए। महज कुछ ही देर में अलग-अलग कलशों के लिए करीब 53 करोड़ रुपये की बोलियां लग गईं। इनमें दो श्रद्धालुओं ने अकेले 16 करोड़ 16 लाख रुपये की बोली लगाकर सबसे अधिक चर्चा बटोरी।
करोड़ों की बोली, पूरे शहर में चर्चा
जानकारी के अनुसार, चातुर्मास आयोजन में कलश स्थापना के लिए एक के बाद एक बोलियां लगती गईं। सबसे बड़ी बोली सपना मनीष गोधा और नवीन आनंद गोधा की ओर से 16 करोड़ 16 लाख रुपये की रही। इसके अलावा अन्य कलशों के लिए भी 5 करोड़, 3 करोड़ 55 लाख, 3 करोड़ 33 लाख और 2 करोड़ से अधिक की बोलियां लगीं। कुल मिलाकर यह आंकड़ा लगभग 53 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
अब उठ रहे हैं नए सवाल
करोड़ों की इन बोलियों के बाद शहर में चर्चा सिर्फ धार्मिक आयोजन की नहीं, बल्कि इतनी बड़ी राशि के भुगतान को लेकर भी शुरू हो गई है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि इतनी बड़ी रकम का भुगतान किस तरह होगा? क्या पूरी राशि एकमुश्त दी जाएगी या चरणबद्ध तरीके से? और क्या इतनी बड़ी वित्तीय प्रतिबद्धताओं पर संबंधित विभागों की भी नजर जाएगी?
आयोजन समिति की क्या है व्यवस्था?
आयोजन से जुड़े लोगों के अनुसार, बोली की राशि तत्काल पूरी जमा नहीं कराई जाती। परंपरा के अनुसार पहले एक निश्चित प्रतिशत राशि जमा कराई जाती है और शेष राशि निर्धारित समय सीमा के भीतर दी जाती है। भुगतान नकद, चेक या अन्य वैध माध्यमों से किया जा सकता है।
चर्चा का केंद्र बनी रिकॉर्ड बोली
इतनी बड़ी बोलियों ने धार्मिक आयोजन को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है। जहां एक ओर श्रद्धालु इसे आस्था और दान की भावना से जोड़कर देख रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इतनी बड़ी रकम को लेकर सामाजिक और आर्थिक स्तर पर भी सवाल उठने लगे हैं।फिलहाल करोड़ों की इन रिकॉर्ड बोलियों ने इंदौर के इस धार्मिक आयोजन को सुर्खियों में ला दिया है और अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि घोषित राशि का भुगतान किस प्रक्रिया के तहत पूरा किया जाता है।
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