अजय सैनी, भिवानी। पशुपालन एवं डेयरिंग विभाग द्वारा इन दिनों गांवों में एक बड़ा सुरक्षा अभियान चलाया जा रहा है। मवेशियों को मुंहखुर (FMD) और गलघोटू (HS) जैसी जानलेवा बीमारियों से बचाने के लिए विभाग की टीमें घर-घर जाकर संयुक्त टीकाकरण कर रही हैं। यह विशेष अभियान 11 मई से शुरू हो चुका है, जो आगामी 11 जून तक लगातार जारी रहेगा। क्षेत्र का कोई भी पशु इस सुरक्षा चक्र से न छूटे, इसके लिए जमीनी स्तर पर पूरी ताकत झोंक दी गई है।

डॉक्टरों की देखरेख में हो रहा काम, तापमान का रखा जा रहा खास ख्याल

पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डॉ. रविंद्र सहरावत ने बताया कि हर पशु चिकित्सालय के अंतर्गत विशेष टीमें गठित की गई हैं। ये टीमें पशु चिकित्सकों (Veterinary Doctors) की निगरानी में काम कर रही हैं। दवा की गुणवत्ता बनी रहे, इसके लिए वैक्सीन को 2 से 8 डिग्री सेंटीग्रेड के जरूरी तापमान पर सुरक्षित रखा जा रहा है। उच्च अधिकारी भी फील्ड में जाकर लगातार इसकी मॉनिटरिंग और जांच कर रहे हैं।

मोबाइल पर आएगा OTP, 12 अंकों के टैग से ऑनलाइन होगा रिकॉर्ड

उपमंडलाधिकारी डॉ. राजेश जाखड़ ने बताया कि इस बार पूरे अभियान को पारदर्शी और डिजिटल बनाया गया है। पशुपालक, पशु और टीके की पूरी जानकारी ऑनलाइन दर्ज की जा रही है। इसके लिए पशु के कान में लगे 12 अंकों के विशिष्ट टैग नंबर का उपयोग किया जा रहा है।

पशुपालकों के लिए जरूरी बात

जब टीम आपके घर पहुंचेगी, तो आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी (OTP) आएगा। ऑनलाइन एंट्री पूरी करने के लिए यह ओटीपी टीम को बताना अनिवार्य है।

अफवाहों पर न दें ध्यान, टीका है पूरी तरह से सेफ

अक्सर पशुपालकों के बीच यह भ्रांति फैल जाती है कि टीका लगाने से मवेशी का दूध सूख जाता है या गर्भपात का खतरा रहता है। इस पर पशु चिकित्सक डॉ. विजय सनसनवाल ने साफ किया कि यह वैक्सीन पूरी तरह से सुरक्षित है।

उन्होंने बताया कि गलघोटू एक जानलेवा बीमारी है और मुंहखुर से पशुपालकों को भारी आर्थिक चपत लगती है। टीका लगने के बाद अगर पशु को हल्का बुखार आता है, तो यह एक सामान्य प्रक्रिया है। इसके लिए तीन दिनों तक बुखार की साधारण गोली दी जा सकती है। साथ ही, अगर टीके के बाद तीन दिनों तक पशु को गुड़ खिलाया जाए, तो दूध उत्पादन में कोई कमी नहीं आती है। विभाग ने सभी किसानों से अपील की है कि वे आगे आकर अपने पशुओं का टीकाकरण जरूर करवाएं।