औरंगाबाद। जिले से एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है, जहां रिश्तों की मर्यादा और बदले की भावना ने चार किशोरों को अपराधी बना दिया। पुलिस ने 20 वर्षीय युवक पीयूष कुमार की हत्या के मामले का खुलासा करते हुए चार नाबालिगों को हिरासत में लिया है। इस हत्याकांड को जिस बेरहमी और शातिराना अंदाज में अंजाम दिया गया, उसने पुलिस प्रशासन को भी हैरान कर दिया है।

​लापता होने से शव मिलने तक का घटनाक्रम

​पीयूष कुमार 27 अप्रैल को अपने घर से एक दोस्त की बहन की शादी में शामिल होने के लिए निकला था, लेकिन उसके बाद वह वापस नहीं लौटा। परिजनों की चिंता तब बढ़ गई जब काफी तलाश के बाद भी उसका कुछ पता नहीं चला। अंततः नबीनगर थाने में गुमशुदगी की प्राथमिकी दर्ज कराई गई। 2 मई को दिग्धी पोखराही स्थित रेलवे अंडरब्रिज के पास एक खेत से एक अज्ञात शव बरामद हुआ। शव की स्थिति इतनी भयावह थी कि चेहरा जानवरों द्वारा खाया जा चुका था। शिनाख्त केवल मृतक के जींस और जूतों के आधार पर हो सकी, जिससे पुष्टि हुई कि वह पीयूष ही था।

​साजिश का ताना-बाना: पार्टी के बहाने मौत का जाल

​पुलिस जांच और पूछताछ में खुलासा हुआ कि हत्या की मुख्य वजह ‘बदला’ थी। आरोपियों में से एक नाबालिग की चाची के साथ पीयूष ने कथित तौर पर बदसलूकी की थी। जब नाबालिग को इस बात का पता चला, तो उसने अपने तीन अन्य दोस्तों के साथ मिलकर पीयूष को रास्ते से हटाने की योजना बनाई।
​योजना के मुताबिक, 28 अप्रैल को व्हाट्सएप चैट के जरिए पीयूष को नबीनगर स्टेशन के पास पार्टी करने के बहाने बुलाया गया। वहां से दो बाइकों पर सवार होकर सभी लोग दिग्धी रेलवे अंडरब्रिज के पास पहुंचे। वहां पहले सभी ने नशा किया। पीयूष, जो पहले से ही शराब के नशे में था, गांजा पीने के बाद पूरी तरह बेसुध हो गया। इसी का फायदा उठाकर चारों नाबालिगों ने पहले उसके साथ मारपीट की और फिर गला दबाकर उसे मौत के घाट उतार दिया।

​साक्ष्य मिटाने की नाकाम कोशिश

​वारदात के बाद आरोपियों ने सबूतों को नष्ट करने के लिए हर संभव प्रयास किया। उन्होंने पीयूष का मोबाइल, घड़ी और जूते अलग-अलग स्थानों पर फेंक दिए। मुख्य आरोपी नाबालिग ने पकड़े जाने के डर से अपना खुद का मोबाइल तोड़कर जला दिया। पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर घटनास्थल से करीब 25 किलोमीटर दूर बटाने नदी से मृतक के मोबाइल के जले हुए अवशेष बरामद किए हैं।

​वैज्ञानिक साक्ष्यों से खुला राज

​मामले की गंभीरता को देखते हुए औरंगाबाद पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर एसआईटी (SIT) का गठन किया गया था। डॉग स्क्वायड, एफएसएल (FSL) टीम और सीसीटीवी फुटेज के तकनीकी विश्लेषण की मदद से पुलिस आखिरकार आरोपियों तक पहुंचने में सफल रही। पकड़े गए चारों किशोर नबीनगर, दाउदनगर और पौथू क्षेत्र के रहने वाले हैं, जो औरंगाबाद में रहकर पढ़ाई कर रहे थे। पुलिस ने इनके पास से 5 मोबाइल भी बरामद किए हैं और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।