Dharm Desk – श्राद्ध पक्ष की शुरुआत के साथ ही पारंपरिक रीति रिवाज में पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और आदर व्यक्त करने का विशेष समय प्रारंभ हो जाता है। सनातन परंपराओं में इस पूरे पखवाड़े (26 सितंबर से 10 अक्टूबर) को आत्म-संयम, सादगी, तर्पण और दान-पुण्य के लिए बहुत जरूरी माना गया है। कहते हैं इन दिनों में हमारे दिवंगत परिजन सूक्ष्म रूप में हमारे आसपास मौजूद रहकर हमें अपना आशीर्वाद देते हैं। इसलिए इस अवधि के दौरान सुख-वैभव की नई चीजों को खरीदने के बजाय पितृगण के स्मरण और उनके प्रति सेवा भाव पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। सदियों से चली आ रही परंपराओं के अनुसार पितृपक्ष में कुछ विशिष्ट वस्तुओं को खरीदने से बचना चाहिए ताकि घर-परिवार में सुख, शांति और सकारात्मक वातावरण बना रहे।इन 5 चीजों की खरीदारी से परहेज करके और अपना ध्यान दान-पुण्य के कार्यों में लगाकर हम अपनी सांस्कृतिक और सामाजिक परंपराओं का सही ढंग से पालन कर सकते हैं।

दिवंगत परिजन की स्मृति में इन चीजों की खरीदारी से बचें

  1. नमक की खरीदारी से करे परहेज
    किचन का सबसे आवश्यक घटक माना जाने वाला नमक हमारी दैनिक दिनचर्या का अहम हिस्सा है। हालांकि पारंपरिक लोक मान्यताओं के अनुसार पितृपक्ष के समय नया नमक खरीदकर घर लाने से सख्त परहेज करना चाहिए। नमक नकारात्मक ऊर्जा के प्रभाव को बढ़ाता है। भारतीय परंपराओं में ये समय आत्म-संयम और भक्ति का प्रतीक होता है। इसलिए रोजमर्रा के उपयोग में आने वाली ऐसी बुनियादी चीजों की नई खरीदारी को टालना ही समझदारी मानी जाती है।घर में नमक की आवश्यकता होतो इसे श्राद्धपक्ष शुरू होने से पहले ही खरीद करके रख लें।
  2. सरसों का तेल
    भोजन पकाने से लेकर दीप प्रज्ज्वलित करने तक के लिए उपयोग में लाया जाने वाला सरसों का तेल इस पावन पखवाड़े में खरीदना शुभ नहीं माना जाता। श्राद्धपक्ष की अवधि में सरसों का नया तेल घर लाना अच्छा नहीं होता क्योंकि इसे एक विशेष प्रकार के परहेज से जोड़कर देखा जाता है।यदि बहुत जरूरी हो तो पूर्वजों के स्मरण को ध्यान में रखते हुए इस तेल का दान करना खरीदारी करने से कहीं अधिक शुभ कारक होता है।
  3. नई झाड़ू की खरीदारी
    घर की साफ-सफाई में उपयोग होने वाली झाड़ू का सीधा संबंध घर की आंतरिक शांति और सुखद वातावरण से जोड़कर देखा जाता है। बुजुर्गों और सामाजिक व्यवस्था के अनुसार श्राद्ध पक्ष के 15 दिनों में नई झाड़ू खरीदने की मनाही होती है। झाड़ू घर की स्वच्छता के साथ-साथ परिवार की स्थिति का प्रतिनिधित्व करती है।और इस अवधि में नई झाड़ू लाने से घर का वातावरन प्रभावित हो सकता है।
  4. नए कपड़ों की खरीदारी
    पितृपक्ष का समय खुद के लिए नए वस्त्र खरीदने या खुद को सजाने का नहीं बल्कि सादगी से जीवन जीने का है। इस दौरान अपने लिए नए फैशनेबल कपड़े खरीदने से बचना चाहिए। पुरानी कहावतों के अनुसार इस अवधि में खुद नए वस्त्र पहनने या खरीदने के स्थान पर अपने पितरों और पूर्वजों के नाम से गरीब असहायों या जरूरतमंदों को कपड़े दान करना अधिक शुभ माना जाता है।
  5. नए जूते-चप्पल और अनावश्यक वस्तुएं
    इस पावन पखवाड़े में किसी भी प्रकार के नए जूते चप्पल या अन्य व्यक्तिगत उपयोग का सामान खरीदने से पूरी तरह बचना चाहिए। इसके अलावा कोई भी नई भौतिक चीज जैसे वाहन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण या सजावटी सामान खरीदने की सलाह नहीं दी जाती। यह समय तर्पण करने और गरीबों को भोजन कराने का है।