अयोध्या. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के स्वागत कार्यक्रम के दौरान कथित मछली भोज को लेकर अयोध्या में विवाद खड़ा हो गया है. संत समाज ने आयोजन पर नाराजगी जताते हुए इसे सावन और एकादशी के धार्मिक महत्व के विपरीत बताया है. संतों ने अजय राय की आलोचना करते हुए मामले में कार्रवाई की मांग की.

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भगवान के दर्शन के बाद मछली भोज पर नाराजगी

हनुमानगढ़ी के पुजारी संत देवेशाचार्य महाराज ने कहा कि भगवान के दर्शन करने के बाद श्रावण माह और एकादशी जैसे पवित्र अवसर पर मछली भोज का आयोजन किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होंने आरोप लगाया कि इससे सनातन परंपराओं और सनातनियों की भावनाओं का अपमान हुआ है. संत ने इस आयोजन को लेकर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि धार्मिक नगरी अयोध्या में ऐसे कार्यक्रमों को लेकर विशेष संवेदनशीलता बरती जानी चाहिए.

संत देवेशाचार्य महाराज ने कहा कि अजय राय ने सनातन का मजाक उड़ाने का काम किया है, सनातनियों का अपमान करने का काम किया है. ये कभी सनातनी के हमदर्द नहीं हो सकते हैं. ये लोग टोपी पहनते हैं और टोपी पहनने वालों को खुश करने का काम करते हैं.

संतों ने जताई कड़ी आपत्ति

संत सीताराम दास ने भी आयोजन पर तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने इसे सनातन परंपराओं के खिलाफ बताते हुए कहा कि ऐसे कृत्य को लेकर समाज में नाराजगी है. उन्होंने दावा किया कि इस तरह के आयोजनों से सनातन समाज की भावनाएं आहत होती हैं. वहीं रामदल ट्रस्ट के अध्यक्ष कल्कि राम ने कहा कि अयोध्या आने वाले श्रद्धालु धार्मिक मान्यताओं का ध्यान रखते हैं और सात्विक जीवन का पालन करते हैं. उन्होंने कांग्रेस नेताओं के कार्यक्रम को लेकर सवाल उठाए.

‘सनातनियों को तोड़ने की साजिश’ का आरोप

संतों ने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल धार्मिक भावनाओं को प्रभावित करने वाली गतिविधियों के जरिए सनातन समाज को बांटने की कोशिश करते हैं. हालांकि, ये आरोप संतों के बयानों पर आधारित हैं. विवाद के बीच अजय राय ने बीजेपी को चुनौती दी है. उन्होंने कहा है कि अगर बीजेपी साबित कर दें कि वह मछली था तो वह अपने पद से इस्तीफा दे देंगे.

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इकबाल अंसारी ने भी दी सलाह

उधर राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले के पूर्व पक्षकार इकबाल अंसारी ने भी लोगों से सावन के महीने में मांस-मछली और शराब से दूर रहने की अपील की. उन्होंने कहा कि सावन पूजा-पाठ और भक्ति का महीना है और अयोध्या जैसे धार्मिक शहर में लोगों को धार्मिक भावनाओं का सम्मान करना चाहिए. उन्होंने सभी से इस दौरान पूजा-पाठ पर ध्यान देने और धार्मिक माहौल बनाए रखने की अपील की. विवाद के बाद अयोध्या में राजनीतिक और धार्मिक चर्चाएं तेज हो गई हैं.