मयंक श्रीवास्तव, अयोध्या. श्रीराम जन्मभूमि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लगाए गए पारिजात के पौधे को ट्रस्ट द्वारा उखाड़े जाने का मामला सामने आया है. इसको लेकर वर्षों से प्रधानमंत्री की मंगलकामना के लिए अनुष्ठान कर रहे रामादल ट्रस्ट के अध्यक्ष पंडित कल्किराम ने गहरी पीड़ा व्यक्त करते हुए आरोप लगाया है और प्रधानमंत्री से धर्मशास्त्र के अनुसार प्रायश्चित करने की अपील की है.
पंडित कल्किराम ने बताया, “14 जनवरी 2014 को जब लोकसभा चुनाव का बिगुल बजा और नरेंद्र मोदी जी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया गया, तभी से मैंने उनके विजयी होने के निमित्त धार्मिक अनुष्ठान प्रारंभ किया. मां भगवती की कृपा से वे प्रचंड बहुमत से प्रधानमंत्री बने. तब से आज तक हर प्रमुख पर्व पर मैं श्रीराम जन्मभूमि के मुख्य पुजारी रहे स्व. सत्येंद्र दास जी को प्रधानमंत्री जी के कल्याण, सर्वत्र मंगल और विजयश्री के लिए भगवा ध्वजा और विजय पताका देता रहा हूं.”
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भूमि पूजन के दिन लगा था दिव्य पारिजात
उन्होंने बताया कि 5 अगस्त 2020 को श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के भूमि पूजन के पावन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत और काशी के विद्वानों की मौजूदगी में पूरे विधि-विधान से भूमि पूजन हुआ था. उसी दिन जन्मभूमि परिसर में, जहां निर्माण काल के दौरान चंदन की लकड़ी से बने अस्थायी मंदिर में रामलला विराजमान थे, उसके ठीक सामने सनातन धर्म के प्रतीक दिव्य पारिजात वृक्ष का पौधा प्रधानमंत्री के हाथों लगाया गया था.बाद में 29 अगस्त 2021 को तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी अयोध्या आकर दर्शन-पूजन के बाद परिसर में रुद्राक्ष का पौधा लगाया था.
पौधा उखाड़ कर फेंक दिया- पुजारी
पंडित कल्किराम के मुताबिक 2024 लोकसभा चुनाव से पहले वे परंपरा के अनुसार फिर से विजय पताका लेकर मुख्य पुजारी सत्येंद्र दास जी के पास पहुंचे तो पुजारी जी नाराज हो गए. पुजारी आचार्य जी अस्वस्थ थे. ध्वजा देखते ही रुष्ट हो गए और बोले – अब इसका कोई मतलब नहीं है. अब इस ट्रस्ट में प्रधानमंत्री का कोई मतलब नहीं है. मैंने आश्चर्य से कारण पूछा तो उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी ने जो पारिजात लगाया था, उसे ट्रस्ट के लोगों ने उखाड़ कर फेंक दिया और वह सूख गया. यह सुनकर मैं स्तब्ध रह गया.”
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चुनाव से पहले ही हटा दिया गया था पौधा
पंडित कल्किराम ने बताया कि उन्होंने इस बारे में पता किया तो पता चला कि 2024 चुनाव से पहले ही उस पौधे को हटा दिया गया था. किसी ने कहा कि उसे हरियाली में शिफ्ट कर दिया गया है.उन्होंने सवाल उठाया, “जिस पौधे को प्रधानमंत्री ने विद्वानों के मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से लगाया हो, उसे हटाने की आवश्यकता ही क्या थी? जिनके प्रयासों से 3 एकड़ की लड़ाई 70 एकड़ से अधिक में बदली और भव्य मंदिर का सपना साकार हुआ, क्या उनके हाथों लगे पौधे के लिए डेढ़ फुट जगह नहीं थी? चंदन वाला अस्थायी मंदिर आज भी घेरा देकर उसी स्थान पर सुरक्षित रखा गया है, फिर उसके सामने लगा पारिजात क्यों उखाड़ दिया गया..इसका दुष्परिणाम होगा’ – पुजारी जी की कही बात आज भी साल रही है
पंडित कल्किराम ने कहा कि पुजारी जी ने उस समय चिंता जताते हुए कहा था कि कल इसका क्या दुष्परिणाम होगा, यह हम जानते हैं. आज वैश्विक स्तर पर प्रधानमंत्री के खिलाफ जो परिस्थितियां बन रही हैं, उसे देखकर मुझे वही बात याद आती है और टीस होती है कि कहीं यह उसी का परिणाम तो नहीं. उन्होंने कहा, “धर्मशास्त्र कहता है कि विधि-विधान से लगाया गया पौधा अगर फलता-फूलता है तो लगाने वाले की समृद्धि बढ़ती है, लेकिन अगर किसी भी कारण से वह नष्ट होता है तो उसका दोष लगाने वाले पर आता है. मैंने इसके प्रमाण भी देखे हैं.दुर्भाग्य से इस घटना के कुछ समय बाद ही मुख्य पुजारी सत्येंद्र दास जी को ब्रेन हेमरेज हुआ और उनका निधन हो गया.
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प्रधानमंत्री से हाथ जोड़कर प्रायश्चित की मांग
अंत में पंडित कल्किराम ने प्रधानमंत्री से भावुक अपील की, “मैं न आज तक किसी भाजपा नेता से मिला हूं, न मिलने की इच्छा रखता हूं. मेरा कोई निजी स्वार्थ नहीं है. मैं अपने परिवार का भरण-पोषण करते हुए निस्वार्थ भाव से आपके मंगल के लिए अनुष्ठान कर रहा हूं. राष्ट्र निर्माण का यह अवसर बार-बार नहीं आता. जेब का धन हम अपनी सुविधा से खर्च कर सकते हैं, पर विधि-विधान का अपना नियम होता है और चूक होने पर उसका प्रायश्चित भी होता है. मेरा आपसे निवेदन है कि विद्वानों से राय लेकर इस भूल का प्रायश्चित कैसे हो, इसका मार्ग निकाला जाए ताकि आपका विजय ध्वज यूं ही फहराता रहे.”

