मथुरा के चर्चित आयुषी हत्याकांड में विशेष न्यायाधीश ईसी एक्ट की अदालत ने युवती के माता-पिता को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. अदालत ने पिता पर सात हजार और मां पर छह हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया.

मथुरा. करीब चार साल पुराने आयुषी यादव हत्याकांड में विशेष न्यायाधीश ईसी एक्ट अरविंद कुमार द्वितीय की अदालत ने बुधवार को मृतका के माता-पिता को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. अदालत ने पिता नितेश यादव पर सात हजार रुपये और मां ब्रजबाला पर छह हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है.

18 नवंबर 2022 को राया क्षेत्र में यमुना एक्सप्रेसवे के लिंक रोड पर कृषि अनुसंधान केंद्र के पास लाल रंग के ट्रॉली बैग से 21 वर्षीय युवती का शव बरामद हुआ था. शव की बाईं छाती पर गोली का निशान था, जबकि सिर, हाथ और पैरों पर चोट के निशान भी मिले थे.

ऐसे हुई पहचान

शव मिलने के बाद पुलिस ने उसे पोस्टमार्टम के लिए भेजा और मृतका की पहचान कराने के प्रयास शुरू किए. 21 नवंबर को मृतका की पहचान दिल्ली के बदरपुर मोड़ बंद एक्सटेंशन निवासी 21 वर्षीय आयुषी यादव के रूप में हुई.

पुलिस की जांच में सामने आया कि आयुषी की हत्या उसके पिता नितेश यादव ने अपनी लाइसेंसी पिस्टल से गोली मारकर की थी. इसके बाद पत्नी ब्रजबाला की मदद से शव को छिपाने के उद्देश्य से यमुना एक्सप्रेसवे के लिंक मार्ग पर फेंक दिया गया था.

पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. बाद में दोनों को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी. मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश ईसी एक्ट की अदालत में हुई.

11 गवाहों की गवाही

मुकदमे की सुनवाई के दौरान आरोपित पक्ष के अधिवक्ता ने दोनों को निर्दोष साबित करने के प्रयास किए. वहीं अभियोजन की ओर से एडीजीसी मुकेश बाबू गोस्वामी ने अदालत के समक्ष दलीलें और साक्ष्य पेश किए.

एडीजीसी के अनुसार, मामले में 11 गवाहों की गवाही और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने माता-पिता को दोषी माना और दोनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई.

जेल भेजे गए दोनों

फैसले के बाद अदालत ने नितेश यादव पर सात हजार रुपये और ब्रजबाला पर छह हजार रुपये का अर्थदंड लगाया. सजा सुनाए जाने के बाद दोनों को आजीवन कारावास की सजा भुगतने के लिए जेल भेज दिया गया.